"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 8 मई 2010

“बचपन” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मुझे याद जब आता है अपना बचपन।
खट्टी-मीठी यादों को लाता जीवन।।


गुल्ली-डण्डा और कबड्डी सारे  खेल निराले,
जब भी खेला करते थे हम  हो-होकर मतवाले,
किलकारी से गूँजा करता था आँगन।
खट्टी-मीठी यादों को लाता जीवन।।


बागों से कच्ची अमियों को तोड़-तोड़ लाते थे,
भुने चने और नमक मिला कर हम इनको खाते थे,
गाँवों में ही पाया है हमने यौवन।
खट्टी-मीठी यादों को लाता जीवन।।


पाटी और बुदक्का लेकर हम पढ़ने जाते थे,
कान्धे पर बस्ता रखकर हम मन में हर्षाते थे,
फिर से बालक बनने को करता है मन। 
खट्टी-मीठी यादों को लाता जीवन।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khubsurat kavita hai
    sach kahun kal hi kuch bachchon ko yahan aam todte dekha tha
    tab yahi ahsaas aaya tha
    bahut khoob surat hai

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर यादे जि, चित्र भी यादो के संग सुंदर लगा

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सहजता से बचपन को याद किया है...सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut bhao liye rachna
    Sashtri ji aap ka contact number mil sakta hai kya?

    उत्तर देंहटाएं
  5. वन्दे मातरम !!
    माँ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!
    एक और उम्दा रचना के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बचपन के दिन भी क्या दिन थे ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर रचना... मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपने बहुत ही सुन्दर रचना लिखा है जिसे पढ़कर मुझे बचपन की याद आ गयी!

    उत्तर देंहटाएं
  9. साधे शब्दों में सुन्दर रचना इसे ही कहते है ......बहुत है अछे ढंग से पेश किया है ....लाजवाब ....हम चाहे अलग-अलग हो....शहर से हो या गाँव से ...उम्र में कितना भी फर्क हो .....हमारा सबका बचपन एक जैसा था ....इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए .....धन्यबाद .....और अंत में इतना ही कहूँगा ..की दुनिया की हर माँ के चरणों में मेरा शत-शत नमन .......

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails