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गुरुवार, 20 मई 2010

“जीवन एक पाठशाला है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक)

ऐसा कोई शख़्श नही है,
आसमान से जो आया हो!
ऐसा कोई नक्श नही है,
जिसने मन नही भरमाया हो!!

जो कुछ भी जिसने सीखा है,
दुनिया ने ही सिखलाया है,
सजना और सवँरना सबको,
दर्पण ने ही बतलाया है,
ऐसा कोई अक्स नही है,
जिसने नूर नही पाया हो!
ऐसा कोई नक्श नही है,
जिसने मन नही भरमाया हो!!

जिसमें ज्ञान भरा है सारा,
जीवन एक पाठशाला है,
मोती-माणिक से रत्नों से,
गुंथी हई मञ्जुलमाला है,
ऐसा कोई दक्ष नही है,
हुनर साथ में जो लाया हो!
ऐसा कोई नक्श नही है,
जिसने मन नही भरमाया हो!!

धरा पटल पर लिखी हुई हैं,
कदम-कदम पर नई इबारत,
चन्दा सूरज को छूती हैं.
अजब-गजब हैं कई इमारत,
ऐसा कोई कक्ष नही है,
जिसने शिल्प न अपनाया हो!
ऐसा कोई नक्श नही है,
जिसने मन नही भरमाया हो!!

प्यार प्रीत की फुलवारी अब,
समरक्षेत्र बन गई धरा है,
आपाधापी मची हुई है,
कहीं राम रहमान मरा है,
ऐसा कोई लक्ष्य नही है,
जिसने तीर नही खाया हो!
ऐसा कोई नक्श नही है,
जिसने मन नही भरमाया हो!!

22 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !
    वाह वाह !

    पग-पग पर है नई इबारत,
    अजब-गजब हैं कई इमारत,
    ऐसा कोई कक्ष नही है,
    जिसने शिल्प न अपनाया हो!
    ऐसा कोई नक्श नही है,
    जिसने मन नही भरमाया हो!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. जीवन एक पाठशाला है,
    गुंथी हई मञ्जुलमाला है,
    ऐसा कोई दक्ष नही है,
    हुनर साथ में जो लाया हो

    बहुत सुन्दर गीत के माध्यम से सन्देश दिया है....खूबसूरत रचना के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत खूब
    अच्छी पर्स्तुती के लिए धन्यवाद जी

    उत्तर देंहटाएं
  4. सच लिखा आपने ....दर्पण दिखला दिया आज तो :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. जो कुछ भी जिसने सीखा है,
    दुनिया ने ही सिखलाया है,
    सजना और सवँरना सबको,
    दर्पण ने ही बतलाया है,

    एकदम खरी बात शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब !! नमन आपको ..........युही नित नयी धूम मचाते रहे !!

    उत्तर देंहटाएं
  7. जीवन एक पाठशाला है,
    गुंथी हई मञ्जुलमाला है,
    ऐसा कोई दक्ष नही है,
    हुनर साथ में जो लाया हो...
    सही कहा ...हर दिन कुछ नया सीखते हैं जीवन की इस पाठशाला में ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. जो कुछ भी जिसने सीखा है,
    दुनिया ने ही सिखलाया है,
    सजना और सवँरना सबको,
    दर्पण ने ही बतलाया है,
    वाकई जीवन ही सच्ची पाठशाला है ..बहुत उम्दा रचना है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह शास्त्री जी । बहुत ज्ञानवर्धक रचना लिखी है । बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत लाजवाब प्रस्तुति, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  11. bahut hi sundar sandesh deti prastuti............ati sundar.

    उत्तर देंहटाएं
  12. जीवन एक पाठशाला है,
    गुंथी हई मञ्जुलमाला है,..

    बहुत सुंदर संदेश है आपकी रचना में ... बहुत कुछ संदेश देती हैं आपके रचनाएँ ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. सही कहा सर जी , सेक्सपियर ने जीवन को एक रंग मंच कहा था , नमन आपको

    उत्तर देंहटाएं
  14. जीवन ही हमें सब कुछ सिखाती है और हम जो कुछ भी सीखते है यही दुनिया में आने के बाद ही सीखते है...शास्त्री जी इस बेहतरीन रचना के लिए दिल से बधाई आपकी लेखनी को प्रणाम करता हूँ..कितने सुंदर सुंदर रचना दिए है दुनिया को...

    उत्तर देंहटाएं
  15. असली मीनाकुमारी की रचनाएं अवश्य बांचे
    फिल्म अभिनेत्री मीनाकुमारी बहुत अच्छा लिखती थी. कभी आपको वक्त लगे तो असली मीनाकुमारी की शायरी अवश्य बांचे. इधर इन दिनों जो कचरा परोसा जा रहा है उससे थोड़ी राहत मिलगी. मीनाकुमारी की शायरी नामक किताब को गुलजार ने संपादित किया है और इसके कई संस्करण निकल चुके हैं.

    उत्तर देंहटाएं

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