| ♥ व्यञ्जनावली-कवर्ग ♥ "क" "क" से कलम हाथ में लेकर! लिख सकते हैं कमल-कबूतर!! "क" पहला व्यञ्जन हिन्दी का, भूल न जाना इसे मित्रवर!! "ख" "ख" से खम्बा और खलिहान! खेत जोतता श्रमिक किसान!! "ख" से खरहा और खरगोश, झाड़ी जिसका विमल वितान!! "ग" "ग" से गङ्गा, गहरी धारा! गधा भार ढोता बेचारा!! "ग" से गमला घर में लाओ, फूल उगाओ इसमें प्यारा!! "घ" "घ" से घण्टा-घर-घड़ियाल! घड़ी देख कर समय निकाल!! "घ" से घड़ा भरो पानी से, जल पी कर हो जाओ निहाल!! "ङ" "ग" को नाक बन्द कर बोलो! अब अपने मुँह को तुम खोलो!! "ङ" का उच्चारण गूँजेगा, कानों में मिश्री सी घोलो!! |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

शास्त्री जी ,
जवाब देंहटाएंआपने बहुत सुन्दर वर्णमाला बनायीं है...कल स्वरावली से परिचय कराया और आज व्यंजनावली....बहुत पसंद आई....
आपके प्रयोगों का सिलसिला बरक़रार रहे यही कामना है!
जवाब देंहटाएंबच्चों को कुछ नए तरीके से सीखाने का यह प्रयास जबरदस्त है। मैं भी बच्चा ही हूं.. कुछ सीख रहा हूं। पहले भी कह चुका हूं और आज फिर कह रहा हूं कि शायद इस तरह की वर्णमाला की मुझे खास तौर पर जरूरत है।
जवाब देंहटाएंआपको धन्यवाद शास्त्री जी।
waah sirji fir se ek badhiya prayog...
जवाब देंहटाएंअरे वाह, कल फरमाईश आज पूरी...
जवाब देंहटाएंशिशुओं के लिए सुंदर शिशुगीत।
जवाब देंहटाएं--------
रूपसियों सजना संवरना छोड़ दो?
मंत्रो के द्वारा क्या-क्या चीज़ नहीं पैदा की जा सकती?
आपकी लगन और आपको नमन !
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लगा,
जवाब देंहटाएंवाह वाह वाह्………………इस तरीके से तो हर बच्चा सिख जायेगा कवर्ग,चवर्ग,टवर्ग,तवर्ग,पवर्ग का ज्ञान्………………आपका प्रयास सराहनीय है।
जवाब देंहटाएंशास्त्री जी।
जवाब देंहटाएंनन्हें-मुन्नों को अक्षर ज्ञान देने के लिए ये बहुत उपयोगी रचनाएं हैं। आपको बहुत-बहुत बधाई।
सद्भावी- डॉ० डंडा लखनवी
/////////////////////////
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंइसे 06.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/
आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" जी की
जवाब देंहटाएंBuzz पर प्राप्त टिप्पणी!
--
sanjiv verma - waah...waah... bahut upyogee... aise prayog mainne bhee kiye hain. bachchon ke bahut kaam ke hain.