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गुरुवार, 3 जून 2010

“अब आ जाओ कृष्ण-कन्हैया” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

krishna
धूल भरी क्यों आज गगन में?
क्यों है अँधियारा उपवन में?


 सूरज क्यों दिन में शर्माया?
भरी दुपहरी में क्यों छाया?

चन्दा गुम क्यों बिना अमावस?
नजर नही आती क्यों पावस?

क्यों है धरती रूखी-रूखी?
क्यों है खेती सूखी-सूखी?

छागल क्यों हो गई विदेशी?
पागल क्यों है आज स्वदेशी?

कहाँ गयी माता की बिन्दी?
सिसक रही क्यों अपनी हिन्दी?

प्यारी भाषा बहक रही क्यों?
अंग्रेजी ही चहक रही क्यों?

कहने भर की आजादी है!
आज वतन की बर्बादी है!!

नजर न आता कहीं अमन है!
दागदार हो गया चमन है!!

कहाँ हो गई चूक भयंकर?
विष उडेलते हैं क्यों शंकर?

रक्षक जब उत्पात मचाये!
विपदाओं से कौन बचाये?

आस लगाये यशोदा मइया!
अब आ जाओ कृष्ण-कन्हैया!!

16 टिप्‍पणियां:

  1. behad dard bhari pukar..........aur aaj ki jaroorat.........bahut hi sundar rachna.

    उत्तर देंहटाएं
  2. पता नहीं वह सौभाग्यशाली दिन कौन सा होगा..

    उत्तर देंहटाएं
  3. देश की विषमता को देख मन की वेदना स्पष्ट दिख रही है इस कविता में....सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  4. रक्षक जब उत्पात मचाये!
    विपदाओं से कौन बचाये?

    आस लगाये यशोदा मइया!
    अब आ जाओ कृष्ण-कन्हैया!!

    कृष्ण द्वापर में आते है, कलयुग में नहीं आयेंगे !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर लिखा है ,,,आज उनकी की जरुरत भी है ,,,अच्छी रचना !!! meri ek rachna par amulya sujhav de

    उत्तर देंहटाएं
  6. अब तो कृष्ण जी चले आयें तो शायद उनका बदला रुप ही नजर आये.

    बेहतरीन रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर भाव के साथ.....बहुत सुन्दर प्रस्तुति.....

    उत्तर देंहटाएं
  8. कहाँ गयी माता की बिन्दी?
    सिसक रही क्यों अपनी हिन्दी?
    एक सार्थक प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी रचनाएं गहरे विचारों से परिपूर्ण होती है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. दर्द भरी और भावपूर्ण रचना! बहुत अच्छा लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपने तो शब्दों में पूरी तरह से मन की वेदना उडेल डाली....
    कृ्ष्ण की जरूरत द्वापर से कहीं अधिक इस कलयुग में अनुभव हो रही है....

    उत्तर देंहटाएं
  12. aayenge krishna kanhaiya, jarur aayenge.........:)

    der hai, andher nahi.....:)

    adbhut rachna........achchi lagee!!

    उत्तर देंहटाएं
  13. सभी को धैर्य रखना होगा.
    भगवान ने तो खुद ही कहा है कि
    धर्म की रक्षा के लिये और अधर्म के विनाश के लिये हर युग मे मै अवतार लेता हूँ.
    और ये कलियुग तो अधर्म का महासागर है.
    कन्हैया के कल्कि अवतार मे अभी देर है अंधेर नही.

    उत्तर देंहटाएं

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