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बुधवार, 30 जून 2010

“ग़ज़ल में प्रार्थना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

कोई फूलों का प्रेमी है,  

कोई कलियों का दीवाना! 

मगर हम उसके आशिक हैं,

वतन का हो जो परवाना!!


जवाँमर्दी उसी की है,

जो रक्खे आग को दिल मे,

हमारी शान का परचम था,

ऊधम सिंह वो मरदाना! 


मुमताजमहल  लाखों देंगे,

बदले में एक पद्मिनी के,

निज आन-बान की रक्षा को, 

देना प्रताप सा महाराणा!



माँ सरस्वती वीणा रखकर,

धारण त्रिशूल कर, दुर्गा बन,

रिपु-दमन कला में, हे माता!

पारंगत मुझको कर जाना!

       

19 टिप्‍पणियां:

  1. lलाजवाब आपकी कलम को सलाम।अभार्

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाकई लाजवाब रचना भाई जी ...निर्मला जी के कथन से सहमत हूँ ! हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  3. माँ सरस्वती वीणा रखकर,

    धारण त्रिशूल कर, दुर्गा बन,

    रिपु-दमन कला में, हे माता!

    पारंगत मुझको कर जाना!

    वाह!!!!
    क्या बात है,
    जब मां भारती का आह्वान होता है,तो
    कवि कलमें गलाकर,तलवारें बनाते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही प्यारी ओर देश प्रेम से ओत प्रोत लगी आप की यह सुंदर कविता. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाकई लाजवाब रचना भाई जी ...निर्मला जी के कथन से सहमत हूँ ! हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब कहा आपने, देशप्रेम की यह रचना दिल को अभिभूत करती हुई ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. देशभक्ति से ओत प्रोत सुन्दर रचना ..

    उत्तर देंहटाएं
  8. लाजबाब ....देशप्रेम से ओतप्रोत कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी लाजवाब कलम को भतीजे का सलाम। पढ़कर मजा आ गया।
    कठिनतम से कठिनतम विषय को सरल तरीके से प्रस्तुत करना कोई आपसे सीखे।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी कलम को सलाम..... बहुत सुंदर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत बढ़िया रचना..शास्त्री जी सुंदर रचना के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  12. यही रचनात्मकता विसंगतियों से लेती लोहा है।
    आपकी लेखनी ने हजारों का मन मोहा है ॥
    आपको बधाई....सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी
    ///////////////////////////////

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  13. देश-भक्ति मे पगी बहुत सुंदर रचना भाईसाहब...!! वन्दे मातरम

    उत्तर देंहटाएं
  14. sachmuch khoob bhavatmak,sundar aur jeevan men kam aane wali.... aap ki kalam men to jadu hai

    उत्तर देंहटाएं

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