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सोमवार, 28 जून 2010

“नभ में काले बादल छाये!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

बारिश का सन्देशा लाये!!  
नभ में काले बादल छाये!
IMG_1525 छम-छम बून्दें पड़ती जल की,  
ध्वनि होती कल-कल,छल-छल की,  
जग की प्यास बुझाने आये!  
नभ में काले बादल छाये!   
IMG_1631 जल से भरा धरा का कोना,  
हरी घास का बिछा बिछौना,  
खुश होकर मेंढक टर्राए!  
नभ में काले बादल छाये!      
IMG_1628पेड़ स्वच्छ हैं धुले-धुले हैं,  
पत्ते भी उजले-उजले हैं,  
फटी दरारें भरने आये!  
नभ में काले बादल छाये!    

18 टिप्‍पणियां:

  1. हाय! इन बादलों को देखकर तो हमारा दिल भी डोल गया………बडी मस्त रचना लिखी है।

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  2. बहुत खूब शास्त्री जी .........मजा आ गया !

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  3. मतलब वहां बारिश हो रही है. हम तो इधर कड़ी धूप झेल रहे हैं अभी भी. सुन्दर रचना.

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  4. आज सुबह दिल्ली में बादल छाये थे

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  5. बहुत सुन्दर कविता...चित्रों में ही बादलों को देख आनंदित हो रहे हैं....शायद दिल्ली दूर है बादलों के लिए अभी

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  6. बहुत सुंदर...मेरे यहा भी आज बादल छाए हुए है...

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  7. शास्त्री जी, प्रणाम. बहुत दिन हो गए. न कंप्यूटर पर बैठा, न किसी ब्लॉग पर गया और न ही कुछ गुफ्तगू कर पाया. इसका मुख्य कारण था घर में शादी का माहौल. क्या करता बहन की शादी जो है. फिर भी आज समय निकाल कर कुछ ब्लॉग के चक्कर काट रहा हूँ. अब ब्लॉग के चक्कर लगाऊ और आपके ब्लॉग पर न आऊ ऐसा नहीं हो सकता. लेकिन आज आपकी जो कविता पढ़ी तो दिल खुश हो गया. लेकिन विडम्बना यह है की भारत में इस समय कई जगह बरसात है. हर बार होती है लेकिन मेरे हिसार से पता नही ऊपर वाले को क्या नाराजगी है. बरसात आती ही नहीं. लेकिन आपकी कविता की कुछ लाइने दिल को सुकून पहुंचाती है.

    छम-छम बून्दें पड़ती जल की,
    ध्वनि होती कल-कल,छल-छल की,
    जग की प्यास बुझाने आये!
    नभ में काले बादल छाये!

    बहुत ही सुन्दर रचना. आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. jalan ho rahi hai aap se guru ji...
    kitna achey mausam mein hain aap aur ek hum hain garmi mein tapp rahey hain!

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  9. बढ़िया लगी चित्रकाव्य झलकी!

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  10. बहुत सुंदर प्रस्तुति...शास्त्री जी रचना अच्छी लगी..धन्यवाद

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  11. मंगलवार 29 06- 2010 को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार


    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. आदरणीय शास्त्री जी ..... आजकल कुछ व्यस्तता ज़्यादा है.... फिर भि कोशिश पूरी रहती है..... आपके ब्लॉग को पढने की....आज की यह रचना बहुत अच्छी लगी....

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  13. बहुत बढ़िया!





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