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शनिवार, 5 जून 2010

“व्यञ्जनावली-कवर्ग” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

♥ व्यञ्जनावली-कवर्ग ♥
"क"
"क" से कलम हाथ में लेकर!
लिख सकते हैं कमल-कबूतर!!
"क" पहला व्यञ्जन हिन्दी का,
भूल न जाना इसे मित्रवर!!


"ख"  
"ख" से खम्बा और खलिहान!
खेत जोतता श्रमिक किसान!!
"ख" से खरहा और खरगोश,
झाड़ी जिसका विमल वितान!!


"ग"
"ग" से गङ्गा, गहरी धारा!
गधा भार ढोता बेचारा!!
"ग" से गमला घर में लाओ,
फूल उगाओ इसमें प्यारा!!


"घ"
"घ" से घण्टा-घर-घड़ियाल!
घड़ी देख कर समय निकाल!!
"घ" से घड़ा भरो पानी से,
जल पी कर हो जाओ निहाल!!


"ङ"
"ग" को नाक बन्द कर बोलो!
अब अपने मुँह को तुम खोलो!!
"ङ" का उच्चारण गूँजेगा,
कानों में मिश्री सी घोलो!!

12 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी ,

    आपने बहुत सुन्दर वर्णमाला बनायीं है...कल स्वरावली से परिचय कराया और आज व्यंजनावली....बहुत पसंद आई....

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपके प्रयोगों का सिलसिला बरक़रार रहे यही कामना है!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बच्चों को कुछ नए तरीके से सीखाने का यह प्रयास जबरदस्त है। मैं भी बच्चा ही हूं.. कुछ सीख रहा हूं। पहले भी कह चुका हूं और आज फिर कह रहा हूं कि शायद इस तरह की वर्णमाला की मुझे खास तौर पर जरूरत है।
    आपको धन्यवाद शास्त्री जी।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह वाह वाह्………………इस तरीके से तो हर बच्चा सिख जायेगा कवर्ग,चवर्ग,टवर्ग,तवर्ग,पवर्ग का ज्ञान्………………आपका प्रयास सराहनीय है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. शास्त्री जी।
    नन्हें-मुन्नों को अक्षर ज्ञान देने के लिए ये बहुत उपयोगी रचनाएं हैं। आपको बहुत-बहुत बधाई।
    सद्भावी- डॉ० डंडा लखनवी
    /////////////////////////

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 06.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  7. आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" जी की
    Buzz पर प्राप्त टिप्पणी!
    --
    sanjiv verma - waah...waah... bahut upyogee... aise prayog mainne bhee kiye hain. bachchon ke bahut kaam ke hain.

    उत्तर देंहटाएं

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