| भगवान निगह-ए-बान है, अल्लाह है करीम। मज़हब-धरम से बाँध मत, मौला को ऐ शमीम।। बख्शी है हर बशर को, उसने इल्म की दौलत, इन्सां को सँवारा है, दे शऊर की नेमत, क्यों भाई को भाई से जुदा कर रहा फईम। मज़हब-धरम से बाँध मत, मौला को ऐ शमीम।1। कर नेक दिल से, रब की इबादत अरे बन्दे, सच्चाई पे चल, दफ्न कर, काले सभी धन्धे, बन जा जमीं का आदमी और छोड़ दे नईम। मज़हब-धरम से बाँध मत, मौला को ऐ शमीम।2। शैतानियत की राह से, नाता तू तोड़ ले, हुब्बे वतन की राह से, नाता तू जोड़ ले, मिल सबसे तू खुलूस से, कह राम और रहीम। मज़हब-धरम से बाँध मत, मौला को ऐ शमीम।3। आबाद मत फरेब कर, नाहक न हो बदनाम, इन्सानियत की राह में, मजहब का नही काम, सबके दिलों बैठ जा, बन करके तू नदीम। मज़हब-धरम से बाँध मत, मौला को ऐ शमीम।4। |
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बहुत ही खुबसूरत शब्दों से सजी भावपूर्ण रचना जो
जवाब देंहटाएंसुंदर सन्देश भी दे रही है....
बहुत अच्छी रचना। बहुत अच्छा संदेश।
जवाब देंहटाएंया देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
आपको नवरात्र की ढेर सारी शुभकामनाएं!
भगवान निगह-ए-बान है, अल्लाह है करीम।
जवाब देंहटाएंमज़हब-धरम से बाँध मत, मौला को ऐ शमीम।। /...
Gajab ka likhte hain aap !
ati sundar.
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"“भगवान निगह-ए-बान है, अल्लाह है करीम।”
जवाब देंहटाएंबिल्कुल सही कहा……………बेहद उम्दा रचना सुन्दर संदेश देती है।
zabardast rachna..........
जवाब देंहटाएंkamaal ka shabd sanyojan aur sundar sandesh deta kaavya.........
बहुत सुंदर रचना.
जवाब देंहटाएंरामराम
भगवान को कौन बाँध सका है।
जवाब देंहटाएंकल 08/अक्तूबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद !