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रविवार, 4 मार्च 2012

"रंगों का त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


फागुन लेकर आया खुशियाँ, मस्ती और बहार।
हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।

धवल चाँदनी से चन्दा ने, नभ का रूप निखारा,
होली की रजनी में फैला, धरती पर उजियारा,
हँसी-ठिठोली की होती है, होली में बौछार।
हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।

नई कोपलें पेड़ों की शाखाओं पर लहराती,
टेसू-सेंमल की कलियाँ अंगारों सी हो जाती,
गुझिया-मठरी की सुगन्ध से महके हैं घर-बार।
हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।

राग-रागिनी, ढपली-ढोलक अभिनव राग सुनाते,
हुलियारे भी नाच-नाच कर, गीत प्रणय के गाते,
इक-दूजे को गले लगाकर, करते प्रेम अपार।
हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।

पीतम्बर पहने सरसों के बिरुए बहुत लुभाते.
झूम-झूमकर, गुन-गुन करते भँवरे दौड़े आते,
मधुमक्खी-तितली रस पीने आयी पंख पसार।
हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,..

    भूले सब सब शिकवे गिले,भूले सभी मलाल
    होली पर हम सब मिले खेले खूब गुलाल,
    खेले खूब गुलाल, रंग की हो बरसातें
    नफरत को बिसराय, प्यार की दे सौगाते,

    उत्तर देंहटाएं
  2. बौराया है आम और बौराये हैं हम तुम ....
    रंग ले इतना खुद को..हो जाएँ भीड़ में गुम..
    :-)

    सुन्दर रचना....
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. पीतम्बर पहने सरसों के बिरुए बहुत लुभाते.
    झूम-झूमकर, गुन-गुन करते भँवरे दौड़े आते,
    मधुमक्खी-तितली रस पीने आयी पंख पसार।
    हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।
    काव्यात्मक फुहार लाये शाष्त्री जी ,
    होरी पे भाये शाष्त्री जी ,नित रंग लगाए शाश्त्री जी ,

    उत्तर देंहटाएं
  4. आहा के आया झूम के होली का त्यौहार
    सभ मस्त, करें कलम से रंगों की फुहार ...!
    सभी को होली की शुभकामनायें..
    :)
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  5. पीतम्बर पहने सरसों के बिरुए बहुत लुभाते..............बहुत खूबसूरत बिम्ब प्रयोग्।

    उत्तर देंहटाएं
  6. यह रंग भरी रचना बहुत खूबसूरत लगी ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. होली पर बहूत बढीया प्रस्तुती ,,
    होली के अवसर पर रंग खेलने से लेकर खान-पान
    का बढीया वर्णन किया है..
    बेहतरीन प्रस्तुती
    ****-----हैप्पी होली -----*****

    उत्तर देंहटाएं
  8. पीतम्बर पहने सरसों के बिरुए बहुत लुभाते.
    झूम-झूमकर, गुन-गुन करते भँवरे दौड़े आते
    ****-----हैप्पी होली -----*****

    उत्तर देंहटाएं
  9. राग-रागिनी, ढपली-ढोलक अभिनव राग सुनाते,
    हुलियारे भी नाच-नाच कर, गीत प्रणय के गाते,...

    बहुत सुन्दर गीत है होली के उपलक्ष में ... लय में बंधा ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर प्रस्तुति
    आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 05-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  11. पूरा होली का माहौल सेट कर दिया आपने...होली की अग्रिम शुभकामनाएं...

    उत्तर देंहटाएं
  12. राग-रागिनी, ढपली-ढोलक अभिनव राग सुनाते,
    हुलियारे भी नाच-नाच कर, गीत प्रणय के गाते,
    इक-दूजे को गले लगाकर, करते प्रेम अपार।
    हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।

    पीतम्बर पहने सरसों के बिरुए बहुत लुभाते.
    झूम-झूमकर, गुन-गुन करते भँवरे दौड़े आते,
    मधुमक्खी-तितली रस पीने आयी पंख पसार।
    हरष रहा है-सरस रहा है, रंगों का त्यौहार।।
    होली उत्सव का आँखों देखा हाल है यह रचना कह सकतें हैं जो नित नवीन वह सौन्दर्य जो हर पला नया रचे वह शाष्त्री (जी )हमारे .प्रकृति भी नित नया रचती है ,आप भी .मुबारक होली का त्यौहार .

    उत्तर देंहटाएं
  13. होली का अभिनन्दन हृदय से है , कविता के प्रति आभार जिसने लहर सी जगा दी है आत्मसात करने को ,..../

    उत्तर देंहटाएं
  14. मानो,प्रकृति भी उत्साहित है इस उत्सव के लिए!

    उत्तर देंहटाएं

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