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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

"कुछ दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कुछ दोहे
दुनिया में रहते सुखी, राजा, रंक-फकीर।
दुःशासन बनकर यहाँ, खींच रहे क्यों चीर।।
--
पत्थर रक्खो हाथ में, नहीं टिकेगी ईंट।
जनता की इक ठेस से, जाता उतर किरीट।।
--
जो आये हैं जायेंगे, ये दुनिया की रीत।
दर्प नहीं करना कभी, करो सभी से प्रीत।।
--
चार चरण, दो पंक्तियाँ, दोहा जिसका नाम।
अमित छाप को छोड़ता, दोहा ललित-ललाम।।
--
नेक नियत रक्खो सदा, बने रहेंगे ठाठ।
फसल उगाओ खेत में, काटो धान्य विराट।।
--
सुन्दर दोहे रच रहे, रविकर जैसे मित्र। 
अनुशंसा की रीत भी,
होती बहुत विचित्र।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. काव्य की प्रभावशाली विधा, सिर्फ चंद शब्दों और पंक्तियों में रचे दोहे सब कुछ दो पंक्तियों में कह जाते हें .तभी तो कहा गया है और वह आप पर पूरा सच साबित होता है .

    सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर, देखन में छोटे लगे घाव करें गंभीर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. काव्य की प्रभावशाली विधा, सिर्फ चंद शब्दों और पंक्तियों में रचे दोहे सब कुछ दो पंक्तियों में कह जाते हें .तभी तो कहा गया है और वह आप पर पूरा सच साबित होता है .

    सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर, देखन में छोटे लगे घाव करें गंभीर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो आये हैं जायेंगे, ये दुनिया की रीत।
    दर्प नहीं करना कभी, करो सभी से प्रीत।।

    सुन्दर संदेशात्मक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह: सभी दोहे बहुत कमाल के हैं....

    उत्तर देंहटाएं
  5. गुरुवर के उपदेश को, रखता शिष्य सँभाल ।

    दूजे की गन पर रखूं , मैं अपनी गरनाल ।


    रही भावना साफ़ जब, नहीं है मन में मैल ।

    कोल्हू में नाधूँ उसे, मारे सिर जो बैल ।



    शब्दों के माहौल में, हूँ हड़-बड़ शैतान ।

    इसीलिए पीछे लगें, अक्सर अति विद्वान ।



    बहुत बहुत आभार है, दें गुरुवर आशीष ।

    साहित्यिक सेवा करूँ, रहूँ नहीं उन्नीस ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. जो आये हैं जायेंगे, ये दुनिया की रीत।
    दर्प नहीं करना कभी, करो सभी से प्रीत।।
    --bahut sundar Dadu...!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर एवं सार्थक प्रस्तुति....

    उत्तर देंहटाएं
  8. sda ki tarah jivan ki sarthakta ko aatmasat kiya .aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सचमुच दोहे तो कमाल ही करते हैं...

    बढ़िया दोहे सर...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही बढ़िया दोहे है,,
    सुन्दर दोहे है.....

    उत्तर देंहटाएं
  11. नेक नियत रक्खो सदा, बने रहेंगे ठाठ।
    फसल उगाओ खेत में, काटो धान्य विराट।।

    वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,बेहतरीन भाव प्रस्तुति,....


    MY RECENT POST ...फुहार....: बस! काम इतना करें....

    उत्तर देंहटाएं
  12. चार चरण, दो पंक्तियाँ, दोहा जिसका नाम।
    अमित छाप को छोड़ता, दोहा ललित-ललाम।।
    दोहे की व्याख्या करे ,दोहे को समझाए ,

    वही शाष्त्री कहाए .

    उत्तर देंहटाएं
  13. जो आये हैं जायेंगे, ये दुनिया की रीत।
    दर्प नहीं करना कभी, करो सभी से प्रीत।।

    बहुत सुंदर दोहे ...
    आभार ,शास्त्री जी .

    उत्तर देंहटाएं
  14. रविकरजी की काव्यात्मक टिप्पणियाँ धूम मचाये हुयें हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  15. अब तो टिप्पणियाँ और भी आनंद देने लगी हैं. कविता में टिप्पणी!

    उत्तर देंहटाएं
  16. सुन्दर संदेशात्मक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  17. आपकी भी बात तो दादा है बड़ी निराली।
    पढ़ पढ़ दोहा आपका मन होय मतवाली।।

    उत्तर देंहटाएं
  18. सुन्दर दोहे रच रहे, रविकर जैसे मित्र।
    अनुशंसा की रीत भी, होती बहुत विचित्र।।
    बढ़िया दोहे भावपूर्ण अभिव्यंजना .

    दिल खोलके तारीफ़ करना कोई इन दोनों दोहागरों से पूछे .रफूगर हैं यह काव्य के .गद्य को पद्य में बदलने वाले आशु माहिर

    उत्तर देंहटाएं

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