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सोमवार, 12 मार्च 2012

"कुछ दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कुछ दोहे
मात-पिता तो यत्न से, पाल रहे सन्तान।
लेकिन पुत्र न मानते, इनका कुछ अहसान।१।

लड़के तो लड़के रहें, लड़ना इनका काम।
बेटे ही तो कर रहे, रिश्तों को बदनाम।२।

सदा अभावों में पली, सहती जो अपमान।
वो बेटी माँ-बाप का, रखती ज्यादा ध्यान।३।

महँगाई की मार का, कुछ तो करो विचार।
पुत्र मोह की आस में. बढ जाता परिवार।४।

19 टिप्‍पणियां:

  1. सदा अभावों में पली, सहती जो अपमान।
    वो बेटी माँ-बाप का, रखती ज्यादा ध्यान !!

    सार्थक दोहे सर......
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपके दोहे बहत ही उम्दा हैं मयंक जी। सचमुच बेटियाँ आज माता-पिता का नाम रौशन कर रही हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सदा अभावों में पली, सहती जो अपमान।
    वो बेटी माँ-बाप का, रखती ज्यादा ध्यान।३।
    सार्थक दोहे......

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपके दोहे बहत ही उम्दा हैं मयंक जी। सचमुच बेटियाँ आज माता-पिता का नाम रौशन कर रही हैं।

    सदा अभावों में पली, सहती जो अपमान।
    वो बेटी माँ-बाप का, रखती ज्यादा ध्यान !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut behtreen dohe sateek ,sarthak .aaj kal blog par adhik samay nahi de paa rahi hoon teen din pahle maa ka dehaant ho gaya bahut dukhi hoon.

    उत्तर देंहटाएं
  6. कन्या के प्रति पाप में, जो जो भागीदार ।
    रखे अकेली ख्याल जब, कैसे दे आभार ।
    कैसे दे आभार, किचेन में हाथ बटाई ।
    ढो गोदी सम-आयु, बाद में रुखा खाई ।
    हो रविकर असमर्थ, दबा दें बेटे मन्या *।
    सही उपेक्षा रोज, दवा दे वो ही कन्या ।

    *गर्दन के पीछे की शिरा



    दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक

    dineshkidillagi.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  7. कितने सुन्दर दोहे हैं सर... !! वाह!
    सादर आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  8. सदा अभावों में पली, सहती जो अपमान।
    वो बेटी माँ-बाप का, रखती ज्यादा ध्यान।|

    आपने बिलकुल सही कहा बेटो से बेटी ज्यादा
    माँ बाप का ध्यान रकहती है
    सार्थक सटीक रचना,.....

    उत्तर देंहटाएं
  9. समाज के कुछ कटु यथार्थ को आपने चित्रित कर दिया है इन दोहों के माध्यम से।

    उत्तर देंहटाएं
  10. महँगाई की मार का, कुछ तो करो विचार।
    पुत्र मोह की आस में. बढ जाता परिवार।४।
    बेहतरीन प्रस्तुति ,आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  12. प्रेरणादायक सार्थक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपको शब्दों की महारत है। इतनी सरलता से बात को प्रभावी बना देना तो तभी संभव है जब शब्द आपकी बात मानते हों।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बेटियों से ही बेटे मिलते हैं. धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  15. महँगाई की मार का, कुछ तो करो विचार।
    पुत्र मोह की आस में. बढ जाता परिवार...
    क्या बात कह दी शास्त्री जी...बहुत खूब...

    उत्तर देंहटाएं
  16. सार्थक दोहे बहुत खूब हैं
    समझते नहीं हैं लोग
    करते हैं फिर वही गलती
    फिर कहते हैं आगे डूब है !

    उत्तर देंहटाएं

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