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बुधवार, 21 मार्च 2012

"पलकों से झरने झरते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जब ग़म के बादल घिरते हैं,
पलकों से झरने झरते हैं।
कुछ खारा जल बह जाने पर,
निर्मल सा अनुभव करते हैं।।

सागर गहराई रखता है,
सबकी वो पीर समाये है।
अपने मन के अनुभावों को,
अन्तस् में स्वयं छुपाये है।
गम्भीर-धीर गुणवाले ही,
जीवन में खरे उतरते हैं।
कुछ खारा जल बह जाने पर,
निर्मल सा अनुभव करते हैं।।

जो केवल अमृत पान करे,
वो देवों का पद पाता है।
लेकिन जो गरलपान करता,
वो महादेव बन जाता है।
जिसमें सारे गुण होते हैं,
उस सत्ता से सब डरते हैं।
कुछ खारा जल बह जाने पर,
निर्मल सा अनुभव करते हैं।।

लगते ही ठेस चटक जाता,
दिल शीशा जैसा होता है।
नाज़ुक होकर भी है कठोर,
पाषाण नहीं वो होता है।
मन सरल-तरल सा सोता है,
जिसमें सब गगरी भरते हैं।
कुछ खारा जल बह जाने पर,
निर्मल सा अनुभव करते हैं।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. धारा-प्रवाह गुरु गाते हैं ,

    सस्नेह अर्थ समझाते हैं ।

    सुख में तो सब जी लेते

    दुःख में वे राह दिखाते हैं ।

    गंभीर धीर गुणवान प्रभु-

    अनुभव को शीश झुकाते हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. दुःख का गरल पियो ऐसे-

      शिव-शंकर ज्यों पी जाते हैं ।।

      हटाएं
    2. दुःख का विष-गरल पियो ऐसे-
      शिव-शंकर ज्यों पी जाते हैं ।।

      हटाएं
  2. मन सरल-तरल सा सोता है,
    जिसमें सब गगरी भरते हैं।
    कुछ खारा जल बह जाने पर,
    निर्मल सा अनुभव करते हैं।।

    बहुत सुन्दर
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. कुछ खारा जल बह जाने पर,
    निर्मल सा अनुभव करते हैं।।..बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस कविता में हमने पाई आधुनिकता के साथ साथ सांस्‍कृतिक परंपरा की झलक।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कुछ खारा जल बह जाने पर,
    निर्मल सा अनुभव करते हैं।।
    शब्दशः सही .....
    सुंदर रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी पोस्ट कल 22/3/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 826:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  7. आँसू जीवन का क्षार बहा ले जाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सरल प्रवाह और तारल्य का दूसरा नाम है शाष्त्री जी .बधाई इस लेखन को .शीश नमन .

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपने मेरे मन की बात इस कविता/गीत के माध्यम से कह दी. धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  10. आँखों से झरने बहते है...कुछ खारा जल बह जाता है...खुबसूरत कविता है...

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह बहुत बढ़िया भाव संयोजन के साथ सार्थक प्रस्तुति......

    उत्तर देंहटाएं
  12. bahut bahut hi shnnandaar p[rastuti ----sir
    kai bhavon ko apne me sanjoye huye yah kavita mujhe bahut bahut hi achhi lagi----
    poonam

    उत्तर देंहटाएं
  13. sundar rachna likhi hai guru jee....

    thanks template change karne ke liye ab theek khul rahee hai!

    उत्तर देंहटाएं
  14. वाह बहुत खूब
    आँसू का आँखों से नाता ...युग कालीन हैं ...कभी ना खत्म होने वाला

    उत्तर देंहटाएं

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