"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 13 मार्च 2012

"दोहे-दल-दल में सरकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


देवभूमि में आ गया, खण्डित जन आदेश।
गुटबन्दी में फँस गया, सत्ता का परिवेश।१।

बिकने को तैयार हैं, प्रत्याशी आजाद।
लोकतन्त्र का हो रहा, रूप यहाँ बरबाद।२।

जोड़-तोड़ होने लगी, खिसक रहा आधार।
जनपथ के आदेश की, हुई करारी हार।३।

चलने से पहले फँसी, दल-दल में सरकार।
दर्जन भर बीमार हैं, लेकिन एक अनार।४।

24 टिप्‍पणियां:

  1. janta kee hai ye pasand janta kee sarkar ,
    mathapachchi kyon karen kyon baithe bekar,
    lage rahenge gar yun hi ham karne apne kam,
    ek din to ho jayega uttam sarkar ka swapn sakar.
    bahut vicharniy prastuti.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. सत्य कटुक कटु सत्य हो, गुरुवर कहे धड़ाक।

    दल-दल में दलकन बढ़ी, दल-दलपति दस ताक।

    दल-दलपति दस ताक, जमी दलदार मलाई ।

    सभी घुसेड़ें नाक, लगे है पूरी खाई ।

    खाई कुआँ बराय, करो मैया ना खट्टा ।

    बैठे भाजप चील, मार न जांय झपट्टा ।।



    दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक

    dineshkidillagi.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढ़िया प्रस्तुति सर...
    आगे आगे देखिये होता क्या है..

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह - बिलकुल सटीक बात कही है सर |

    उत्तर देंहटाएं
  5. खराब ग्रह-नक्षत्र
    पिट रही भद्द
    यत्र-तत्र-सर्वत्र

    उत्तर देंहटाएं
  6. sach bat ....iftada -e- siyasat hi rota hai kya....age age dekhiye hota hai kya

    उत्तर देंहटाएं
  7. चलने से पहले फँसी, दल-दल में सरकार।
    दर्जन भर बीमार हैं, लेकिन एक अनार।४।
    मौजू दोहे कोंग्रेस का काला बदन उघाड़ते हुए .आज ही विदित हुआ मम्मीजी दुनिया के रईसों में चौथा स्थान बनाए हुए हैं .बोलो जय मम्मी जी .

    उत्तर देंहटाएं
  8. दर्जन भर बीमार हैं, लेकिन एक अनार।
    बढ़िया प्रस्तुति....

    उत्तर देंहटाएं
  9. देखना है आगे क्या होता है..
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत बढ़िया प्रस्तुति,उतरांचल पर सटीक सत्य रचना,....

    RESENT POST...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...

    उत्तर देंहटाएं
  11. सजी मँच पे चरफरी, चटक स्वाद की चाट |
    चटकारे ले लो तनिक, रविकर जोहे बाट ||

    बुधवारीय चर्चा-मँच
    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  12. भारत देश में तो ऐसे कितने ही जोड़ तोड़ हुवे हैं ...
    अपने सही शब्दों में बाँधा है इस पीड़ा को ... नमस्कार शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. जोड़-तोड़ होने लगी, खिसक रहा आधार।
    जनपथ के आदेश की, हुई करारी हार।३।

    देवभूमि में डल-दल... क्या बात ... हास्य -व्यंग दोनों

    उत्तर देंहटाएं
  14. दर्जन भर बीमार हैं, लेकिन एक अनार।...क्या कहने!...वाह,वाह!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails