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रविवार, 18 मार्च 2012

"बदल जाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों आज अपनी पसंद की
एक पुरानी रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ!

युग के साथ-साथ, सारे हथियार बदल जाते हैं।
नौका खेने वाले, खेवनहार बदल जाते हैं।।

प्यार मुहबाबत के वादे सब निभा नहीं पाते हैं,
नीति-रीति के मानदण्ड, व्यवहार बदल जाते हैं।

"कंगाली में आटा गीला" भूख बहुत लगती है,
जीवनयापन करने के, आधार बदल जाते हैं।

जप-तप, ध्यान-योग, केबल, टीवी-सीडी करते हैं,
पुरुष और महिलाओं के संसार बदल जाते हैं।

क्षमा-सरलता, धर्म-कर्म ही सच्चे आभूषण हैं,
आपाधापी में निष्ठा के, तार बदल जाते हैं।

फैसन की अंधी दुनिया ने, नंगापन अपनाया,
बेशर्मी की ग़फ़लत में, शृंगार बदल जाते हैं।

माता-पिता तरसते रहते, अपनापन पाने को,
चार दिनों में बेटों के, घर-बार बदल जाते हैं।

भइया बने पड़ोसी, बैरी बने ज़िन्दग़ीभर को,
भाई-भाई के रिश्ते और प्यार बदल जाते हैं।

23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    इंडिया दर्पण की ओर से शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 19-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. जी
    एक से बढ़कर एक पुरानी
    रचनाएं पढने को मिल रही हैं--
    बहुत-बहुत आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. भाई मेरे हुवे पडोसी, जिन्हें साथ माँ पोसी ।

    आज खून रिश्ते से रिसता, बना खून का दोषी ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. शानदार प्रस्तुति
    ।माता-पिता तरसते रहते, अपनापन पाने को,
    चार दिनों में बेटों के, घर-बार बदल जाते हैं।

    MY RESENT POST... फुहार....: रिश्वत लिए वगैर....

    उत्तर देंहटाएं
  6. "क्षमा-सरलता, धर्म-कर्म ही सच्चे आभूषण हैं,
    आपाधापी में निष्ठा के, तार बदल जाते हैं"

    सरल रचना - सत्य बचन .. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  7. भइया बने पड़ोसी, बैरी बने ज़िन्दग़ीभर को,
    भाई-भाई के रिश्ते और प्यार बदल जाते हैं।--------- सही फरमाया यही तो हो रहा है
    खूबसूरत रचना

    उत्तर देंहटाएं
  8. शब्दश : सत्य व सुन्दर . प्रशंसनीय प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  9. अच्छे छंद हैं शास्त्रीजी ! पुराने चावल की गंध ही अलग होती है ! बधाई !!
    --आ. व. ओ.

    उत्तर देंहटाएं
  10. माता-पिता तरसते रहते, अपनापन पाने को,
    चार दिनों में बेटों के, घर-बार बदल जाते हैं।
    अच्छी विचार परक प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्षमा-सरलता, धर्म-कर्म ही सच्चे आभूषण हैं,
    आपाधापी में निष्ठा के, तार बदल जाते हैं।……………रंग बदलती दुनिया का सुन्दर चित्रण्।

    उत्तर देंहटाएं
  12. जितनी तारीफ़ करें उतनी कम..बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  13. जीवन जीते हुए ...जीवन का सार ही बदल जाता हैं

    उत्तर देंहटाएं

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