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गुरुवार, 1 मार्च 2012

‘‘दोहे-खिलते हुए पलाश’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


उच्चारण सुधरा नहीं, बना नहीं परिवेश।
अँग्रेजी के जाल में, जकड़ा सारा देश।१।

भूल गये है मनचले, हिन्दुस्तानी भेष।
भौँडे कपड़े धार के, किया कलंकित देश।२।

लाँघ रहे सीमाओं को, नंगा कर सिंगार।
मोबाइल से सुन रहे, गोरों की झंकार।३।

फागुन के परिवेश में, होली का आनन्द।
फाग-फुहारों से सजे, गीत हो गये मन्द।४।

खुला निमन्त्रण दे रहे, खिलते हुए पलाश।
पूरब की ले सभ्यता, और न करो विनाश।५।

अम्बुआ, जामुन-नीम भी, देते हैं ये सीख।
परदेशों के सामने, माँग रहे क्यों भीख।६।

18 टिप्‍पणियां:

  1. खुला निमन्त्रण दे रहे, खिलते हुए पलाश।
    अपनाकर निज सभ्यता, अब मत करो विनाश।५।

    sunder abhivyakti ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. vaah shastri ji kamaal ke maanav sudhaarak dohe prastut kiye hain maja aa gaya.

    उत्तर देंहटाएं
  3. न अंग्रेज, न भारतीय, बस वर्णसंकर होकर रह गये हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. खुला निमन्त्रण दे रहे, खिलते हुए पलाश।
    पूरब की ले सभ्यता, और न करो विनाश।५।
    अम्बुआ, जामुन-नीम भी, देते हैं ये सीख।
    परदेशों के सामने, माँग रहे क्यों भीख।६
    वाह..!

    उत्तर देंहटाएं
  5. अम्बुआ, जामुन-नीम भी, देते हैं ये सीख।
    परदेशों के सामने, माँग रहे क्यों भीख''''

    वाह....बहुत खूब सुंदर रचना.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. खुला निमन्त्रण दे रहे, खिलते हुए पलाश।
    पूरब की ले सभ्यता, और न करो विनाश।५।

    अम्बुआ, जामुन-नीम भी, देते हैं ये सीख।
    परदेशों के सामने, माँग रहे क्यों भीख।६।

    ्क्या खूब कहा है…………शानदार
    होली के रंग ऐसे भी गिरने चाहिये
    सामने वालों के चेहरे पीले पडने चाहिये

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर दोहे.सुंदर रचना.....

    उत्तर देंहटाएं
  8. फुहार और फटकार एक साथ!!!
    :-)

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  9. खुला निमन्त्रण दे रहे, खिलते हुए पलाश।पूरब की ले सभ्यता, और न करो विनाश।५।

    बढ़िया संदेशपूर्ण रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  10. मलें कालिख
    कहते कर्णधार
    चिंतित देश

    उत्तर देंहटाएं
  11. "अम्बुआ, जामुन-नीम भी, देते हैं ये सीख
    परदेशों के सामने, माँग रहे क्यों भीख"

    अति सुन्दर,मनभावन व प्रेरणा दायक दोहे.... होली की शुभ कामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  12. शुक्रवारीय चर्चा मंच पर आपका स्वागत
    कर रही है आपकी रचना ||

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  13. उच्चारण सुधरा नहीं, बना नहीं परिवेश।
    अँग्रेजी के जाल में, जकड़ा सारा देश।१।
    कितने शहरी हो गए लोगों के ज़ज्बात ,
    हिंदी भी करने लगी अंग्रेजी में बात .
    अव्वल रचना है शाष्त्री जी की .

    उत्तर देंहटाएं

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