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सोमवार, 5 मार्च 2012

"प्रीत बढ़ाएँ होली में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


दिल से दिल को आज मिलाएँ, रंगों की रंगोली में।
आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।

एक साल में एक बार यह पर्व सलोना आता है,
फाग-फुहारों के पड़ने से जुड़ता दिल से नाता है,
संगी-साथी को बैठाएँ, अरमानों की डोली में।
आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।

पड़े हुए हैं अलग-थलग जो, रिश्तों में दरार आई,
उनको टीका कर गुलाल का, भर दो अब गहरी खाई,
आओ फिर सम्बन्ध बनाएँ, बिछुड़े दामन-चोली में।
आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।

नहीं साँच को आँच, होलिका जली दर्प की ज्वाला में,
शक्ति असीमित भरी हुई है प्रभू नाम की माला में,
प्यार भरा आशीष निहित है, अक्षत्-चन्दन रोली में।
आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. होली की बहुत-बहुत मुबारक आप सब को !
    शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. होली के पर्व की बहुत बहुत शुभकामनएं

      हटाएं
  2. नहीं साँच को आँच, होलिका जली दर्प की ज्वाला में,
    शक्ति असीमित भरी हुई है प्रभू नाम की माला में,
    प्यार भरा आशीष निहित है, अक्षत्-चन्दन रोली में।
    आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।
    बहुत ही अनुपम भाव लिए ... होली की शुभकामनाएं ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. नहीं साँच को आँच, होलिका जली दर्प की ज्वाला में,
    शक्ति असीमित भरी हुई है प्रभू नाम की माला में,
    प्यार भरा आशीष निहित है, अक्षत्-चन्दन रोली में।
    आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।


    sundar rachna bandhai swikaren
    Holi ki dhero shubhkamnaon ke sath

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति


    होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
    कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  6. नहीं साँच को आँच, होलिका जली दर्प की ज्वाला में,
    शक्ति असीमित भरी हुई है प्रभू नाम की माला में,
    प्यार भरा आशीष निहित है, अक्षत्-चन्दन रोली में।
    आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।
    बहुत खूब ...आओ सबसे प्यार बढाए होली में ..

    उत्तर देंहटाएं
  7. इतनी सुन्दर कविता को पढवाने के लिए धन्यवाद. होली की शुभकामनाएँ ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह!!!!!बहुत बढ़िया भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,...
    शास्त्री जी,...होली की बहुत२ बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर ! होली का सन्देश बहुत ही सार्थक लगा. होली पर रंग बिरंगी सुभकामनाएँ. !

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह सर |||
    बहुत ही बेहतरीन रचना है....
    होली के विभिन्न रंगों की तरह ,होली पर लिखी आपकी सारी रचनाये
    अलग अलग रंग बिखेर रहीं है..
    और इस रचना में सुन्दर सन्देश का रंग है....
    *** happy holi****

    उत्तर देंहटाएं
  11. नहीं साँच को आँच, होलिका जली दर्प की ज्वाला में,
    शक्ति असीमित भरी हुई है प्रभू नाम की माला में,
    प्यार भरा आशीष निहित है, अक्षत्-चन्दन रोली में।
    आओ शिकवे-गिले मिटायें, प्रीत बढ़ाएँ होली में।।

    होली की शुभकामनाएँ ...

    उत्तर देंहटाएं
  12. प्रीत बढ़ाएँ होली में...बहुत ही खूबसूरत भाव...होली वस्तुतः सौहार्द का त्यौहार है...

    उत्तर देंहटाएं
  13. प्रभावशाली रचना !
    रंगोत्सव की शुभकामनायें स्वीकार करें !

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  15. holi ki badhai ho sabhi ko....
    http://jadibutishop.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं

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