"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 6 मई 2012

"पत्थरों में से धारे निकल आयेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रंग भी रूप भी छाँव भी धूप भी,
देखते-देखते ही तो ढल जायेंगे।
देश भी भेष भी और परिवेश भी,
वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।

ढंग जीने के सबके ही होते अलग,
जग में आकर सभी हैं जगाते अलख,
प्रीत भी रीत भी, शब्द भी गीत भी,
एक न एक दिन तो मचल जायेंगे।
वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।

आप चाहे भुला दो भले ही हमें,
याद रक्खेंगे हम तो सदा ही तुम्हें,
तंग दिल मत बनो, संगे दिल मत बनो,
पत्थरों में से धारे निकल आयेंगे।
वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।

हर समस्या का होता समाधान है,
याद आता दुखों में ही भगवान है,
दो कदम तुम बढ़ो, दो कदम हम बढ़ें,
रास्ते मंजिलों से ही मिल जायेंगे।
वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।

ग़म की दुनिया से वाहर तो निकलो ज़रा,
पथ बुलाता तुम्हें रोशनी से भरा,
हार को छोड़ दो, जीत को ओढ़ लो,
फूल फिर से बगीचे में खिल जायेंगे।
वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. सकारात्मक सोच देती सुंदर रचना ....!!
    शुभकामनायें ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत रचना .... निराश मन को हौसला देती हुई ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्या बात है!!
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस कविता में शास्त्री टच थोड़ा कम लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  5. ग़म की दुनिया से वाहर तो निकलो ज़रा,
    पथ बुलाता तुम्हें रोशनी से भरा,
    हार को छोड़ दो, जीत को ओढ़ लो,
    फूल फिर से बगीचे में खिल जायेंगे।

    सुंदर सुरीला गीत......

    गीत यूँ ही मोहब्बत के गाते रहें
    और दिल में हमारे समाते रहें.
    हम भी सीखें जरा, ज्ञान पाके खरा
    हम जमाने से आगे निकल जायेंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  6. हर समस्या का होता समाधान है,याद आता दुखों में ही भगवान है
    ...क्या खूब कही आपने,...धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आशावादी विचारों से सजी ... लाजवाब रचना शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. हर समस्या का होता समाधान है,
    यही तो मूलमंत्र है ..
    सकारात्मक सोच की सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  9. सकारात्मक सोच सुंदर रचना ....आभार /

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails