"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 18 मई 2012

"माँ का कर्ज चुकाना है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
कई वर्ष पहले यह गीत रचा था!
पिछले साल इसे श्रीमती अर्चना चावजी को भेजा था।
उसके बाद मैं इसे ब्लॉग पर लगाना भूल गया।
आज अचानक ही एक सी.डी. हाथ लग गई,
जिसमें मेरा यह गीत भी था!
इसको बहुत मन से समवेत स्वरों में मेरी मुँहबोली भतीजियों श्रीमती अर्चना चावजी और उनकी छोटी बहिन रचना बजाज ने गाया है। आप भी इस गीत का आनन्द लीजिए!



तन से, मन से, धन से हमको, माँ का कर्ज चुकाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

राम-कृष्ण, गौतम, गांधी की हम ही तो सन्तान है,
शान्तिदूत और कान्तिकारियों की हम ही पहचान हैं।
ऋषि-मुनियों की गाथा को, दुनिया भर में गुंजाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

उनसे कैसा नाता-रिश्ता? जो यहाँ आग लगाते हैं,
हरे-भरे उपवन में, विष के पादप जो पनपाते हैं,
अपनी पावन भारत-भू से, भय-आतंक मिटाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

जिनके मन में रची बसी, गोरों की काली है भाषा,
ये गद्दार नही समझेंगे, जन,गण, मन की अभिलाषा ,
हिन्दी भाषा को हमको, जग की शिरमौर बनाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

प्राण-प्रवाहक, संवाहक हम, यही हमारा परिचय है,
हम ही साधक और साधना, हम ही तो जन्मेजय हैं,
भारत की प्राचीन सभ्यता, का अंकुर उपजाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

वीरों की इस वसुन्धरा में, आयी क्यों बेहोशी है?
आशाओं के बागीचे में, छायी क्यों खामोशी है?
मरघट जैसे सन्नाटे को, दिल से दूर भगाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर रचना,..अर्चना की मधुर आवाज में लाजबाब प्रस्तुति

    MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर.................
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. मधुर कंठ ...सुंदर अभिव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर आवाज सुंदर अभिव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. वीरों की इस वसुन्धरा में, आयी क्यों बेहोशी है?
    आशाओं के बागीचे में, छायी क्यों खामोशी है?
    मरघट जैसे सन्नाटे को, दिल से दूर भगाना है।
    फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।……………सुन्दर आवाज़ के साथ खूबसूरत रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर गीत और बेहतरीन गायन

    उत्तर देंहटाएं
  7. उनसे कैसा नाता-रिश्ता? जो यहाँ आग लगाते हैं,
    हरे-भरे उपवन में, विष के पादप जो पनपाते हैं,
    अपनी पावन भारत-भू से, भय-आतंक मिटाना है।
    फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

    ओज और सांगीतिक लय ताल लिए सार्थक प्रस्तुति .सस्वर सुनना नया अनुभव रहा ताजगी देता रहा कितने ही पल .

    ram ram bhai
    शुक्रवार, 18 मई 2012
    ऊंचा वही है जो गहराई लिए है

    उत्तर देंहटाएं
  8. मॉं का कर्ज़ कभी चुकाया जा सकता है क्‍या ?
    मॉं को समर्पित कोई भी चीज़ पूजनीय है ।

    मेरी पोस्‍ट पर स्‍नेह के लिए धन्‍यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. मॉं का कर्ज़ कभी चुकाया जा सकता है क्‍या ?

    मॉं को समर्पित कोई भी वस्‍तु पूजनीय है ।

    मेरी पोस्‍ट के प्रति स्‍नेह के लिए शुक्रिया ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर आवाज सुन्दर गीत :-)

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुन्दर प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

    उत्तर देंहटाएं
  12. बेहतरीन .. आवाज़ और गीत दोनों

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर मन को छूने वाली रचना !

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails