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सोमवार, 28 मई 2012

"फल जीवन देने वाले हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

घर की वाटिकाओं में हमको, सब्जी-शाक उगाना है।
शोषण और कुपोषण से, खुद बचना और बचाना है।।

गैया-भैंसों का हमको लालन-पालन करना होगा
अण्डे-मांस छोड़कर, हमको दूध-दही अपनाना है। 
शोषण और कुपोषण से, खुद बचना और बचाना है।। 

छाछ और लस्सी कलियुग में अमृततुल्य कहाते हैं
पैप्सी, कोका-कोला को, भारत से हमें भगाना है। 
शोषण और कुपोषण से, खुद बचना और बचाना है।। 

दाड़िम और अमरूद आदि, फल जीवन देने वाले हैं
आँगन और बगीचों में, फलवाले पेड़ लगाना है। 
शोषण और कुपोषण से, खुद बचना और बचाना है।। 

मानवता के हम संवाहक, ऋषियों के हम वंशज हैं
दुनिया भर को फिर से, शाकाहारी हमें बनाना है। 
शोषण और कुपोषण से, खुद बचना और बचाना है।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर......
    बेहद नेक सलाह.....

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. एकदम सही कहा है
    शाकाहारी चीजे ही गुणकारी और लाभकारी
    होती है..
    बेहतरीन सन्देश देती रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह वाह वाह शिक्षाप्रद सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 29/5/12 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह बहुत बढ़िया प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  6. इसी तरह देश का विकास संभव है..

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही बढिया ... आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही बढ़िया जानकारी दी है आपने...आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  9. हमने तो अपनी बगिया में फल सब्जियां लगायीं हैं ..:)

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर सोच ..और समाज से सराकोर रखती हुवी...और रचना भी उतनी ही प्यारी

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर सोच .. प्यारी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  12. क्रोध वासना दंभ ने, दीन्हे कष्ट बढ़ाय |
    मन निर्मल सात्विक बने, शाकाहार उपाय ||

    उत्तर देंहटाएं
  13. सब से अच्छा भोज है,भैया शाकाहार|
    दूध और फल,शाक से होगा युग- उद्धार||

    उत्तर देंहटाएं

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