साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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बुधवार, 23 मई 2012

"शिव का डमरू बन जाऊँगा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जो मेरे मन को भायेगा,
उस पर मैं कलम चलाऊँगा।
दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,
आगे को बढ़ता जाऊँगा।।

मैं कभी वक्र होकर घूमूँ,
हो जाऊँ सरल-सपाट कहीं।
मैं स्वतन्त्र हूँ, मैं स्वछन्द हूँ,
मैं कोई चारण भाट नहीं।
कहने से मैं नहीं लिखूँगा,
गीत न जबरन गाऊँगा।
दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,
आगे को बढ़ता जाऊँगा।।

भावों की अविरल धारा में,
मैं डुबकी खूब लगाऊँगा।
शब्दों की पतवार थाम,
मैं नौका पार लगाऊँगा।
घूम-घूम कर सत्य-अहिंसा
 की मैं अलख जगाऊँगा।
दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,
आगे बढ़ता जाऊँगा।।

चाहे काँटों की शय्या हो,
या नर्म-नर्म हो सेज सजे।
सारंगी का गुंजन सुनकर,
चाहे ढोलक-मृदंग बजे।
अत्याचारी के दमन हेतु,
शिव का डमरू बन जाऊँगा।
दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,
आगे बढ़ता जाऊँगा।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रेरक रचना!...बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  3. भावों की अविरल धारा में,
    मैं डुबकी खूब लगाऊँगा।
    शब्दों की पतवार थाम,
    मैं नौका पार लगाऊँगा।
    घूम-घूम कर सत्य-अहिंसा
    की मैं अलख जगाऊँगा।
    दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,
    आगे बढ़ता जाऊँगा।।
    Bahut shaandar !

    उत्तर देंहटाएं
  4. शीर्ष कैबिनेट ब्रह्म का, पञ्च मुखी हैं माथ ।

    चार देवता पक्ष के, नहीं पांचवा साथ ।


    नहीं पांचवा साथ, सदा पूंजी-पति राक्षस ।
    देता टांग अड़ाय, होय अच्छा बिल वापस ।

    शंकर से फिर बोल, छुडाओ मारक राकेट ।
    कटे गधे का शीश, ठीक हो शीर्ष कैबिनेट ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह ...बहुत ही बढि़या भाव संयोजित किये हैं आपने ..आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अत्याचारी के दमन हेतु,
    शिव का डमरू बन जाऊँगा।


    इन सुंदर और दृढ निश्चयी पंक्तियों में छुपे संकल्प के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छे भाव सुन्दर संकल्प ,आज कल के पापियों का नाश करने के लिए तो शिव का डमरू बहुत जरूरी है

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह...
    बहुत सुंदर.....
    आज बहुत ज़रूरत है किसी शिव के तांडव की......

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत जोशीले नजर आ रहे हैं
    सीधे शिव का डमरू ही बजा रहे हैं।
    वाह !!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. शिव का डमरू बन जाऊँगा।
    दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,
    आगे बढ़ता जाऊँगा।।
    बहुत सुन्दर रचना..
    सुन्दर प्रस्तुति:-)

    उत्तर देंहटाएं
  12. घूम-घूम कर सत्य-अहिंसा
    की मैं अलख जगाऊँगा।
    sundar bhaav ..!

    उत्तर देंहटाएं
  13. घूम-घूम कर सत्य-अहिंसा
    की मैं अलख जगाऊँगा।

    बहुत सुंदर भाव ... अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी पोस्ट 24/5/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा - 889:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  15. आपकी कल्पना शक्ति और भावपूर्ण लेखन को बार बार नमन.

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सार्थक विचार ...
    शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  17. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

    आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं

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