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शुक्रवार, 25 मई 2012

"लगा रहेगा आना-जाना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


वर्तमान है नया-नवेला,
कल को होगा यही पुराना।
जीवन के इस कालचक्र में,
लगा रहेगा आना-जाना।।

गोल-गोल है दुनिया सारी,
चन्दा-सूरज गोल-गोल है।
गोल-गोल में घूम रहे सब,
गोल-गोल की यही पोल है।
घूम-घूमकर, सारे जग को,
बना रहा है काल निशाना।
जीवन के इस कालचक्र में,
लगा रहेगा आना-जाना।।

दिन दूनी औ रात चौगुनी,
बढ़ती जातीं अभिलाषाएँ।
देश-काल के साथ बदलतीं,
पाप-पुण्य की परिभाषाएँ।
धन संचय की होड़ लगी है,
लेकिन साथ नहीं कुछ जाना।
जीवन के इस कालचक्र में,
लगा रहेगा आना-जाना।।

कहीं सरल हैं कहीं वक्र हैं,
बहुत कठिन जीवन की राहें।
मंजिल पर जानेवालों की,
छोटे पथ पर लगी निगाहें।
लेकिन लक्ष्य उसे ही मिलता,
जिसने सही मार्ग पहचाना।
जीवन के इस कालचक्र में,
लगा रहेगा आना-जाना।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. sahi kaha guru jee...aana jaana to sansaar ki reet hai....apne jeevak ko kitna saarthak kiya yahee mudde ki baat hai!

    उत्तर देंहटाएं
  2. जीवन के इस कालचक्र में,
    लगा रहेगा आना-जाना।।

    So true ..

    .

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर भाव दार्शनिक तत्थ्य के साथ बिलकुल सही कहा है

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार गुरु जी ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. जीवन के इस कालचक्र में,
    लगा रहेगा आना-जाना।।

    जीवन का सत्य यही है,....

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिन दूनी औ’ रात चौगुनी,
    बढ़ती जातीं अभिलाषाएँ।
    देश-काल के साथ बदलतीं,
    पाप-पुण्य की परिभाषाएँ।
    धन संचय की होड़ लगी है,
    लेकिन साथ नहीं कुछ जाना।
    जीवन के इस कालचक्र में,
    लगा रहेगा आना-जाना।।
    गोल गोला यानी स्फीयर एक सममिति लिए है .प्रकृति इसी सममिति से चलती है प्यार करती है गोल आकार को इसीलिए मेरे भाई फूली हुई रोटी गोल है जीवका प्राथमिक भोजन माँ का स्तन गोल है और सुन भैया परमाणु गोल है .बढ़िया प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  7. कहीं सरल हैं कहीं वक्र हैं,
    बहुत कठिन जीवन की राहें।
    मंजिल पर जानेवालों की,
    छोटे पथ पर लगी निगाहें।
    लेकिन लक्ष्य उसे ही मिलता,
    जिसने सही मार्ग पहचाना।
    जीवन के इस कालचक्र में,
    लगा रहेगा आना-जाना……………यही सत्य है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. लेकिन लक्ष्य उसे ही मिलता,
    जिसने सही मार्ग पहचाना।

    बहुत सुन्दर रचना सर....
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  9. वर्तमान है नया-नवेला,
    कल को होगा यही पुराना।
    जीवन के इस कालचक्र में,
    लगा रहेगा आना-जाना।।
    वर्तमान है नया-नवेला,
    कल को होगा यही पुराना।
    जीवन के इस कालचक्र में,
    लगा रहेगा आना-जाना।।
    कहती थी यूं मम्मी मेरी ,
    नया एक दिन ,सौ दिन रहे पुराना
    वस्त्र बदलकर सबको जाना
    बहुत अच्छी प्रस्तुति है शाष्त्री जी ,
    रोज़ ही रचते एक अ - फ़साना

    उत्तर देंहटाएं
  10. जीवन का यह रंग दिखा है और दिखा है आना जाना।

    उत्तर देंहटाएं
  11. दिन दूनी औ’ रात चौगुनी,
    बढ़ती जातीं अभिलाषाएँ।
    देश-काल के साथ बदलतीं,
    पाप-पुण्य की परिभाषाएँ।
    गज़ब के भाव हैं ..सुन्दर कविता.

    उत्तर देंहटाएं

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