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मंगलवार, 4 जून 2013

"हो रहा आभास है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

खण्डरों को देख कर, ये हो रहा आभास है
आत्माओं का यहाँ पर, आज भी आवास है

जो यहाँ आता उसी को दे रहीं सन्देश हैं
खो गये हैं सब पुराने अब यहाँ परिवेश हैं

स्वाधीनता हम छोड़ आये थे तुम्हारे वास्ते
किन्तु तुमने तो बदल डाले सभी वो रास्ते

वारिसों ने आज ये, प्रपंच है कैसा रचा
प्रजा गायब हो गई है, तन्त्र ही बाकी बचा

 आज घोटाले पनपते, तन्त्र की ही आड़ में
भर रहे अपना उदर सब, देश जाए भाड़ में

घूसखोरी का वतन में, कब थमेगा सिलसिला
झूठ की बुनियाद पर, कब तक टिकेगा ये किला

क्या शहीदों की शहादत का यही अंजाम है
देश में अब वीरता का हो रहा अपमान है

अब नहीं अवतार लेंगे, इस धरा पर हम कभी
देखकर इस रूप को, आहत हुए हैं हम सभी  

21 टिप्‍पणियां:

  1. न जाने किस राह चली है यह आजादी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 07-06-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।


    जय हिंद जय भारत...

    कुलदीप ठाकुर...

    उत्तर देंहटाएं
  3. यह उक्ति सहसा याद हो आई , " हम क्या थे, क्या हो गए और क्या होंगे अभी" बहुत कचोटता है यह प्रश्न ! यही टीस इस रचना में भी मुखर हुई है। यह वेदना साझी है !

    उत्तर देंहटाएं
  4. मं आपका बहुत बहुत आभारी हु.......................

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सही, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज घोटाले पनपते, तन्त्र की ही आड़ में
    भर रहे अपना उदर सब, देश जाए भाड़ में-------

    आदरणीय आप वर्तमान के सच को अपनी रचनाओं में बहुत जीवंतता और सटीक व्याख्या के साथ उकेर देते है
    सादर

    आग्रह है
    गुलमोहर------

    उत्तर देंहटाएं
  7. आजकल ऎसी श्रेष्ठ कवितायें बहुत कम पढ़ने को मिल रही हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  8. खेत को जब बाड़ खाए |
    भाड़ में तब देश जाए ||

    आभार गुरुवर-
    बढ़िया प्रस्तुति-

    उत्तर देंहटाएं
  9. aapke dard se sahmat hoon ..bahut hi bhawnapurn prastuti ....

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्या शहीदों की शहादत का यही अंजाम है
    देश में अब वीरता का हो रहा अपमान है
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
    अब तो यही लग रहा है शहीदों ने बलिदान इन घोटालेबाजों के लिए ही किया था.शायद उनकी आत्मा यह सब देख कर पछता रही होगी.

    उत्तर देंहटाएं

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