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बुधवार, 5 जून 2013

"छन्दों का विज्ञान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नकल विदेशों की करें, वानर की सन्तान।
चित्रगीत को हाइगा, बतलाते नादान।।
 
भूल गये अपनी विधा, छन्दों का विज्ञान।
क्षणिकाओं को हाईकू, बता रहे गुणवान।।
 
वेदों ने हमको दिया, आदिकाल में ज्ञान।
इनके जैसा है नहीं, जग में छन्दविधान।।
 
हमने दुनिया को दिया, कविताओं का ढंग।
किन्तु विदेशों का चढ़ा, आज हमीं पर रंग।।
 
लुप्त हुई है चेतना, सोया हुआ दिमाग।
ओ भारत के आदमी, सुबह हुई अब जाग।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. वाह सभी दोहे छंद कि धारा ....मन को भा गये , सरजमीँ को अपनी कहानी सुना गये ..सुंदर रचनायें

      हटाएं
  2. जिसमे कोई लय और भाव न हो कविता नही कहलाती ,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. चित्रगीत को हाइगा, बतलाते नादान।
    ...

    भूल गये अपनी विधा, छन्दों का विज्ञान।
    क्षणिकाओं को हाईकू, बता रहे गुणवान।।

    ...

    आनंद आ गया शास्त्री जी ,
    काश लोग आपके दर्द को समझ सकें मगर अफ़सोस यहाँ सब विद्वान हैं , शायद ही कोई पढने की कोशिश करे !
    इसी कष्ट में होली पर लिखीं कुछ पंक्तियाँ आपको भेंट हैं !

    ब्लोगिंग करते
    सब चलता है !
    कुछ भी लिखदो
    सब छपता है !
    जिनको कहीं न सुनने वाले,यहाँ पर बजतीं ताली हैं !
    यहाँ पन्त जी और मैथिली , अक्सर भरते पानी हैं

    कचरा लिख दो ,
    कूड़ा लिख दो !
    कुछ ना आये ,
    कविता लिख दो
    कवि बैठे हैं, माथा पकडे ,कविता कैसी होली है !
    एक पंक्ति में,दो शब्दों की, माला लगती सोणी है !

    कापी कर ले ,
    जुगत भिडाले !
    ब्लोगर बनकर
    नाम कमा ले ,
    मधुर गीत की बातें अब तो,बड़ी पुरानी हो ली हैं !
    ताऊ ने हाइकू लिखमारा,शिकी की गागर फोड़ी है !

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुरूदेव बहुत सुन्दर!
    इस विडम्बना से मुक्ति मिलती दिखती नहीं।
    आपका आभार कि आपने यह विषय उठाया!
    सादर!

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपने तो पूरा विज्ञान रख दिया अब कोई समझ सके तो जरूर समझेगा…………बहुत सुन्दर व संदेशपरक प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया है गुरुवर-
    शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  7. अच्छी प्रस्तुति !!
    आभार आदरणीय !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बढिया लिखा आपने, पर लोग कैसे भी हो अपने हाथ तो रंग ही रहे हैं, धीरे धीरे मंज भी जायेंगे.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  9. शब्दों को साधने में संस्कृति का सहारा हम सदा लेते रहेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत बढ़िया..पूरा विज्ञान ही लिख डाला..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत बढ़िया सारी सच्चाई लिख डाली आपने .......
    आइना भी है विदेशी रंगरूटों के लिए

    उत्तर देंहटाएं

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