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शुक्रवार, 19 मार्च 2010

“श्यामपट (BLACK-BOARD” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


SHIYAMPAT

तीन टाँग के ब्लैकबोर्ड की,

मूरत कितनी प्यारी है।

कोकिल जैसे इस स्वरूप की,

सूरत जग से न्यारी है।


कालचक्र में बदल गया सब,

पर तुम अब भी चमक रहे हो।

समयक्षितिज पर ध्रुवतारा बन,

नित्य नियम से दमक रहे हो।


बना हुआ अस्तित्व तुम्हारा,
राम-श्याम बन रमे हुए हो।
विद्यालय हों या दफ्तर हों,
सभी जगह पर जमे हुए हो।

रंग-रूप सबने बदला है,
तुम काले हो, वही पुराने।
जग को पाठ पढ़ानेवाले,
लगते हो जाने पहचाने।

अपने श्यामल तन पर तुम,
उज्जवल सन्देश दिखाते हो।
भूले-भटके राही को तुम,
पथ और दिशा बताते हो।

हिन्दी और विज्ञान-गणित,
या अंग्रेजी के हों अक्षर।
नन्हें सुमनों को सिखलाते,
ज्ञान तुम्ही हो जी भरकर।

गुण और ज्ञान बालकों के,
मन में इससे भर जाता।
श्यामपटल अध्यापकगण को,
सबसे अधिक सुहाता।

11 टिप्‍पणियां:

  1. श्याम पट पर इतनी सुन्दर पंक्तियाँ पढ़ कर आनन्द आया....बहुत सटीक रचना ...

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  2. अपने श्यामल तन पर तुम,
    उज्जवल सन्देश दिखाते हो।
    भूले-भटके राही को तुम,
    पथ और दिशा बताते हो।
    वाह वाह्………बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति और प्रेरक सन्देश।मज़ा आ गया।

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक और बढ़िया बाल-कविता , शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर कविता इस शयाम पटल से कितने ही लोग उज्जवल भाविष्या ले कर निकले है....

    उत्तर देंहटाएं
  5. श्याम पट पर इतनी सुन्दर पंक्तियाँ पढ़ कर आनन्द आया....बहुत सुन्दर रचना ..वैसे Sir !अब श्वेत पट (White board) भी आ गया है :).

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! उम्दा प्रस्तुति। बधाई!

    उत्तर देंहटाएं

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