| अगर दिलदार ना होता! जहाँ में प्यार ना होता!! न होती सृष्टि की रचना, न होता धर्म का पालन। न होती अर्चना पूजा, न होता लाड़ और लालन। अगर परिवार ना होता! जहाँ में प्यार ना होता!! चमन में पुष्प खिलते क्यों, हठी भँवरे मचलते क्यों? महक होती हवा में क्यों, चहक होती हुमा में क्यों? अगर शृंगार ना होता! जहाँ में प्यार ना होता!! वजन ढोता नही कोई, स्रजन होता नही कोई। फसल बोता नही कोई, शगल होता नही कोई। अगर घर-बार ना होता! जहाँ में प्यार ना होता!! अदावत भी नही होती, बग़ावत भी नही होती। नही दुश्मन कोई होता, गिला-शिकवा नही होता। अगर गद्दार ना होता! जहाँ में प्यार ना होता!! कोई मरता नही जीता, गरल कोई नही पीता। परम सुख-धाम पाने को, नही पढ़ता कोई गीता। अगर संसार ना होता! जहाँ में प्यार ना होता!! |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |
nice poem
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंचमन में पुष्प खिलते क्यों,
जवाब देंहटाएंहठी भँवरे मचलते क्यों?
बेहतरीन। लाजवाब।
दिलदार ही तो प्यार का आधार होता है
जवाब देंहटाएंसुन्दर
बहुत सटीक रचना ..जीवन के दर्शन को बता दिया है...इस संसार में ये सब होना भी ज़रूरी है...बहुत बढ़िया प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंnice
जवाब देंहटाएंबढ़िया गीत!
जवाब देंहटाएं--
माँग नहीं सकता न, प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे!
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संपादक : सरस पायस
bilkul sach keha sir !
जवाब देंहटाएंItna achchha kaise likh lete hai aap?
जवाब देंहटाएंhame bhi bataiiyega
बहुत सुंदर रचना.
जवाब देंहटाएंरामराम.
प्यार अजनबी है...
जवाब देंहटाएंप्यार जरूरी है....
और हमें आपकी कविताओं और गीतों से प्यार है. ...
चमन में पुष्प खिलते क्यों,
जवाब देंहटाएंहठी भँवरे मचलते क्यों?
महक होती हवा में क्यों,
चहक होती हुमा में क्यों?
अगर शृंगार ना होता!
जहाँ में प्यार ना होता!!
वाह वाह! अत्यंत सुन्दर! बिल्कुल सही कहा है आपने! लाजवाब रचना!