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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

“ब्लॉगिंग की भूमिका” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में 
ब्लॉगिंग की भूमिका 
 
 हिन्दी ब्लॉगिंग की आयु सात वर्ष से अधिक की हो गई है! जबकि अंग्रेजी ब्लॉगिंग की अवस्था इससे दूनी है! 1997 में अंग्रेजी ब्लॉगिंग शुरू हुई थी और हिंदी ब्लोगिंग की शुरुआत ०२ मार्च २००३ को हुई थी और हिंदी का पहला अधिकृत ब्लॉग होने का सौभाग्य प्राप्त है नौ दो ग्यारह को । वर्ष-२००३-२००४ हिंदी ब्लोगिंग का पूर्वार्द्ध काल है । इन दोनों वर्षों में हिंदी ब्लोगिंग का बहुत ज्यादा विकास नहीं हो पाया, यह क्रम कमोवेश वर्ष-२००७ तक चला । वर्ष-२००८ में हिंदी ब्लॉग निर्माण में अप्रत्याशित ढंग से वृद्धि हुई और वर्ष-२००९ आते- आते वृद्धि दर एक सम्मानजनक सोपान पर पहुँचने में सफल रही ।
हमें अंग्रेजी और दुनिया की अन्य भाषाओं के द्वारा की जा रही ब्लॉगिंग से अपनी तुलना नहीं करनी है बल्कि यह विचार करना है कि हम ब्लॉगिंग के द्वारा हिन्दी भाषा और साहित्य को किस प्रकार समृद्ध कर सकते हैं ।
यूँ तो इस समय अंग्रेजी के ब्लॉगों की संख्या करोड़ों में है और हिन्दी के ब्लॉग अभी 20 हजार का आँकडा भी पार नहीं कर पाये हैं। इसका कारण है कि आज दुनिया के हर कोने में अंग्रेजी लिखी व पढ़ी जाती है । लेकिन जापान देश ऐसा है जहाँ के लोग बहुतायत में अपनी जापानी भाषा में में ही ब्लॉगिंग करते हैं! वहीं हम भारतीय अपनी मानसिकता नही बदल पाये हैं।
आज जो लोग हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहे हैं उनमें से अधिकांश युवा वर्ग के हैं । जिन्हें ब्लॉगिंग की तकनीक का ज्ञान है। पुराने और धुरन्धर माने जाने वाले हिन्दी के मनीषी अभी ब्लॉगिंग में बहुत कम हैं क्योंकि उन्हें इसका तकनीकी ज्ञान नहीं के बराबर है। कुछ लोग तो हिन्दी ब्लॉगिंग केवल इसलिए कर रहे हैं कि उन्हें अपने चहेतों की टिप्पणियाँ- बहुत बढ़िया”, “बहुत खूब”, “सुन्दर”, “बहुत अच्छी प्रस्तुतिआदि शब्दों से सुख मिलता है!
लेकिन कुछ लोग वास्तव में साहित्य स्रजन कर रहे हैं। विडम्बना यह है कि ऐसे लोगों की पोस्टों पर पाठकों की आवाजाही बहुत कम है क्योंकि उनके पास न ही गुट है तथा न ही उन्हें गुटबन्दी की कला आती है!
आज जहाँ वर्तमान पीढ़ी में पढ़ने-लिखने की प्रवृत्ति का निरन्तर ह्रास हो रहा है वहीं हिन्दी ब्लॉगिंग का सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। इसके द्वारा साहित्य के प्रति लोगों में रुझान तो अवश्य बढ़ा है। कारण यह है कि मंहगाई के इस दौर में अच्छी-अच्छी पुस्तकें खरीदना हर एक के बस की बात नहीं रह गई है। जबकि इण्टरनेट पर साहित्य मुफ्त में सुलभ हो जाता है। बहुत से लोग तो नेट का प्रयोग केवल ब्लॉगिंग लिखने के लिए ही करते हैं । लेकिन मेरे विचार से इसका उपयोग लिखने के साथ-साथ पढ़ने के लिए भी होना चाहिए! तभी तो हिन्दी भाषा और साहित्य का विकास ब्लॉगिंग के द्वारा सम्भव होगा! लेकिन इतना तो निश्चित है कि हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में ब्लॉगिंग की भूमिकाको नकारा नहीं जा सकता है।
जिस प्रकार कभी हिन्दी सिनेमा ने हिन्दी को प्रचारित और प्रसारित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था लगभग वही कार्य हिन्दी ब्लॉगिग भी कर रही है! अन्तर केवल इतना है कि हिन्दी सिनेमा ने यहाँ आम बोलचाल की हिन्दी को दुनिया के कोने-कोने में पहुँचाया वहीं हिन्दी ब्लॉगिंग हिन्दी के उन्नत रूप को दुनियाभर में पहुँचाकर हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रही है! इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि जालजगत पर अनुवादक (ट्रांसलेटर) मौजूद है! जिसके कारण हिन्दी में लिखी पोस्टों को विश्व के लोग निरंतर पढ़ रहे हैं।
ब्लॉगिंग में लिखने की और उसको प्रकाशित करने की स्वतन्त्रता है इससे आपका लिखा हुआ आपकी लेखन पुस्तिका तक ही सीमित नहीं रह जाता अपितु वह दुनिया के कोने-कोने तक तुरन्त पहुँच भी जाता है। लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह भी है कि बिना कम्प्यूटर और नेट के आपका स्रजन आम व्यक्ति तक नहीं पहुँच पाता है। फिर भी देश ही नही विदेशों तक आपकी बात तो इससे पहुँच ही जाती है । यह सब ब्लॉगिंग के कारण ही सम्भव हुआ है। आप लिखिए और तुरन्त पोस्टिंग कीजिए। न प्रकाशकों के चक्कर लगाने की जरूरत और न ही मोटी रकम खर्च करके इसको छपवाने का भार।
कुछ लोगों की धारणा है कि ब्लॉग पोस्ट की आयु मात्र 24 घण्टा या जब तक दूसरी पोस्ट न लगा दें तब तक ही होती है किन्तु मेरा मानना है कि यह धारणा बिल्कूल निर्मूल है। मैंने ट्रैफिक देख कर यह अनुमान लगाया है कि पुरानी पोस्ट को अभी भी पढ़ा जा रहा हैं। अर्थात आप जो लिख रहे हैं वह अनन्तकाल तक जीवित रहेगा।
इसलिए अब ब्लॉगिंग का मर्म लोगों की समझ में आता जा रहा है और प्रतिदिन नये-नये हिन्दी चिट्ठे बनते जा रहे हैं जिससे हिन्दी भाषा और साहित्य का विकास निरन्तर होता जा रहा है।
कुछ हिन्दी चिट्ठे तो वाकई में साहित्यिक ही हैं। इस कड़ी में मैं कविता कोशका उल्लेख करना अपना कर्तव्य समझता हूँ। जिसमें हिन्दी के पुराने और नये रचना धर्मियों की रचनाओं का भारी-भरकम संग्रह मौजूद है।
हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में ब्लॉगिंग की भूमिका ही नही बल्कि इसका महत्वपूर्ण योगदान भी है। क्योंकि हिन्दी की ब्लॉगिंग सिर्फ भारतवर्ष में ही नही की जा रही है अपितु विदेशों में बसे भारतीय भी हिन्दी ब्लॉगिंग में सतत योगदान कर रहे हैं। आज  समीर लाल समीर’, राम त्यागी, दीपक मशाल, स्वप्नमंजूषा शैल अदा, पूजा, डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, अल्पना वर्मा, पूर्णिमा वर्मन, ऊर्मि चक्रवर्ती, दिगम्बर नासवा, शिखा वार्ष्णेय, रानी विशाल, भारतीय नागरिक, पराया देश वाले राज भाटिया सरीखे अनेकों ब्लॉगर हिन्दी में ब्लॉगिंग करके हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में अपना योगदान कर रहे हैं।

24 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी भाषा की इस विकास-यात्रा को जारी रखने के लिये हर हिन्दीभाषी को अपनी योग्यता व क्षमतानुसार अधिकतम योगदान देना ही चाहिये ।

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  2. अच्‍छा आलेख। विधा विशेष में लिखा हुआ आपका सृजन हमेशा पठनीय रहेगा और गूगल सर्च द्वारा पढ़ा जाएगा।

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  3. बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित आलेख लिखा है जो ब्लोगिंग के प्रति लोगों की सोच को और पुख्ता करेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित आलेख लिखा है जो ब्लोगिंग के प्रति लोगों की सोच को और पुख्ता करेगा।

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  5. सर, आपने अच्छा गहन लेख लिखा है यह. पढ़ कर आनंद आया. सादर.

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  6. सार्थक आलेख.स्थितियां सुधर रही हैं.पनपने में वक्त लगेगा.
    आभार.

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  7. अभी तो प्रवाह बना है और आपने संपन्‍न कर दिया।

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  8. आपका चिन्तन बड़ा फलदायी होगा। ब्लॉगिंग हिन्दी साहित्य को दिशा देने में सक्षम है।

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  9. पण्डित जी!बहुत अच्छी या सार्थक पोस्ट भी नहीं कहूँगा...बेहद वैज्ञानिक तरीके और बेबाकी से आपने इसविधा की चर्चा की है और मर्म को छुआ है.

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  10. बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित आलेख ,
    धन्यवाद...

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  11. यूँ तो इस समय अंग्रेजी के ब्लॉगों की संख्या करोड़ों में है और हिन्दी के ब्लॉग अभी 20 हजार का आँकडा भी पार नहीं कर पाये हैं। इसका कारण है कि आज दुनिया के हर कोने में अंग्रेजी लिखी व पढ़ी जाती है ।
    आदरणिया शास्त्री जी मै आप की इस बात से सहमत नही हुं, पुरे युरोप मे इग्लेंड को छोड कर बाकी कही भी अग्रेजी नही बोली जाती, जापान, चीन ओर इन्ही जेसे अन्य देशो मे अग्रेजी नही बोली जाती , पुरे अरब देशो मै अग्रेजी नही बोली जाती, ओर हर जगह ब्लागिग मजे से होती हे, हमारे यहां साधन कम हे, सभी लोगो के पास अपना पीसी नही, नेट कनेकशन नही, आधे से ज्यादा अनपढ हे,ऎसे ही ओर भी बहुत से कारण हे,जब सब के पास अपना पीसी हो तो देखे केसे हम दुनिया मे सब से ज्यादा ब्लागिग करते हे. धन्यवाद

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  12. संख्या में बढ़ोत्तरी की कल्पना कैसे हो फ़िर भी सोचा तो जा सकता है

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  13. वैसे टिप्पणीयों के बारे में ज़्यादा उर्ज़ा नष्ट न की जावे

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  14. ज्ञानवर्धक आलेख. हिन्दी में लिखने वाले सभी महानुभाव एक पुण्य का काम कर रहे हैं. यदि यह जारी न रहा तो संस्कृत की तरह ही हिन्दी भी काल-कवलित हो जायेगी.

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  15. Sir!! aapke ye alekh mujhe "bahut achchha" kahne ko badhya kar raha hai...:)

    waise bloggers ke liye gyanvardhak bhi kah dun to atosyokti nahi hogi..:)

    hai na
    sir kabhi hamara bhi marg darshan karen...!

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  16. सार्थक आलेख ! हिंदी ब्लॉग -जगत के विभिन्न पहलुओं पर अच्छा प्रकाश डाला है !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  17. दोस्तों
    आपनी पोस्ट सोमवार(10-1-2011) के चर्चामंच पर देखिये ..........कल वक्त नहीं मिलेगा इसलिए आज ही बता रही हूँ ...........सोमवार को चर्चामंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराएँगे तो हार्दिक ख़ुशी होगी और हमारा हौसला भी बढेगा.
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  18. आपने ब्लोगिंग सम्बन्धी बहुत-सी ज़रूरी जानकारी दी, कृतज्ञ हूँ.

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