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मंगलवार, 18 जनवरी 2011

"अमन का सन्देश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


सेवा का व्रत धार लिया है।
मानवता से प्यार किया है।। 

रंग बहुत थे ढंग बहुत थे,
कभी न उल्टा पथ अपनाया,
जिसको अपना मीत बनाया,
उससे ही है धोखा खाया,
हमने सूई-धागा लेकर,
बैरी का भी वक्ष सिया है।
मानवता से प्यार किया है।। 

झंझावातों के दलदल में,
कभी किसी का हाथ न छोड़ा,
शरणागत को गले लगाया,
मर्यादा का साथ न तोड़ा,
अमृत रहे बाँटते जग को,
हमने केवल गरल पिया है।
मानवता से प्यार किया है।।


अपनी झोली में से हम तो,
सच्चे मोती बाँट रहे है,
बैर-भाव की खाई को हम,
प्रेम-प्रीत से पाट रहे हैं,
सन्तो ने जो सिखलाया है,
जग को वो उपहार दिया है।
मानवता से प्यार किया है।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. झंझावातों के दलदल में,
    कभी किसी का हाथ न छोड़ा,
    शरणागत को गले लगाया,
    मर्यादा का साथ न तोड़ा,
    अमृत रहे बाँटते जग को,
    हमने केवल गरल पिया है।
    मानवता से प्यार किया है।।

    सार्थक!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. हमने केवल गरल पिया है।
    मानवता से प्यार किया है।।
    वाह..
    बेहद सार्थक एवं बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई एवं शुभकामनायें स्वीकार करें |

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक एक पंक्ति सार्थक और सोद्देश्य है..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत खुब देशभक्ति की भावना.....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. शास्त्री जी! सच्ची मानवतावादी रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  6. मानवता से प्यार किया है ...
    सार्थक सन्देश !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी रचना बहुत सारगर्भित और सुन्दर लगी | गणतंत्र दिवस के लिये अभी से शुभ कामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर और नेक विचारों को आपने पिरोया है

    उत्तर देंहटाएं
  9. मानवता से प्यार किया है।।

    sabhi ko karna bhi chahiye...

    sundar rachna har baar ki tarah guru ji!

    उत्तर देंहटाएं
  10. अमृत रहे बाँटते जग को,
    हमने केवल गरल पिया है।
    मानवता से प्यार किया है।।
    बहुत उत्तम प्रस्तुति, नेक जज्बात. शुभकामनाओं सहित...

    उत्तर देंहटाएं
  11. रंग बहुत थे ढंग बहुत थे,
    कभी न उल्टा पथ अपनाया,
    जिसको अपना मीत बनाया,
    उससे ही है धोखा खाया,
    हमने सूई-धागा लेकर,
    बैरी का भी वक्ष सिया है।
    मानवता से प्यार किया है।।
    बहुत सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  12. हमने सूई-धागा लेकर,
    बैरी का भी वक्ष सिया है।
    मानवता से प्यार किया है।

    सुन्दर सन्देश देती हुई अच्छी रचना ..

    उत्तर देंहटाएं
  13. अपनी झोली में से हम तो,
    सच्चे मोती बाँट रहे है,
    बैर-भाव की खाई को हम,
    प्रेम-प्रीत से पाट रहे हैं,...

    प्रेम और प्रीत का संदेश देती लाजवाब रच्न ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. मानवता से किया प्यार ही काम आयेगा।

    उत्तर देंहटाएं

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