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बुधवार, 26 जनवरी 2011

"अब बसन्त आने वाला है" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक")


जेठ और आषाढ़ माह में,
फूल बसन्ती जैसे खिलते।
लू के गरम थपेड़े खा कर,
अमलतास के झूमर हिलते,
सेमल के इस महावृक्ष का,
पतझड़ में गदराया तन है।
पत्ते सारे सिमट गये हैं,
शाखाओं पर लदे सुमन हैं।।
टेसू के पेड़ों पर भी तो,
लाल अँगारे दहक रहे हैं।
अद्भुत् छटा वनों में फैली,
कुसुम डाल पर चहक रहे हैं।।

देते हैं सन्देश हमें यह,
अब बसन्त आने वाला है।
धूप गुनगुनी बोल रही है,
अब जाड़ा जाने वाला है।।
बासन्ती परिधान पहनकर
सरसों पीली फूल रही है।
गेंहूँ के कोमल बिरुओं पर,
हरी बालियाँ झूल रहीं हैं।।
प्रेमदिवस आने वाला है,
मस्त नज़ारों में खो जाएँ।
मौसम आमन्त्रण देता है,
खुश होकर हम नाचें-गाएँ।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. पूरा देश प्रतीक्षा कर रहा है। आपने आगाज़ किया है,अंजाम भी फलित होकर रहेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  2. धूप गुनगुनी बोल रही है,
    अब जाड़ा जाने वाला है।।

    बस कल बाहर धूप में बैठकर यही सोच रहे थे।

    उत्तर देंहटाएं
  3. अब तो लगता है कि बसंत आया, बहुत खूब ,।

    उत्तर देंहटाएं
  4. देते हैं सन्देश हमें यह,
    अब बसन्त आने वाला है।
    धूप गुनगुनी बोल रही है,
    अब जाड़ा जाने वाला है।।
    bahut sunder.

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपने तो आगाज़ कर दिया ……………फिर देर कैसी?
    बहुत ही सुन्दर वसन्तमयी प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर
    बसंत क़ा सुन्दर वर्णन

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत खुब...वसंत के आगमन पर एक सुंदर प्रस्तुति,,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  8. देते हैं सन्देश हमें यह,
    अब बसन्त आने वाला है।
    धूप गुनगुनी बोल रही है,
    अब जाड़ा जाने वाला है।
    बहुत सुन्दर रचना है। बधाई बसंत के इन्तजार की।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आद.मयंक जी,

    बासन्ती परिधान पहनकर
    सरसों पीली फूल रही है।
    गेंहूँ के कोमल बिरुओं पर,
    हरी बालियाँ झूल रहीं हैं।।

    वसंत के आगमन का बड़ा ही सजीव चित्रण किया है !
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर वसन्तमयी प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं

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