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गुरुवार, 27 जनवरी 2011

"आज कुछ दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 (1)
छन्द-शास्त्र गायब हुए, मुक्त हुआ साहित्य।
गीत और संगीत से, मिटा आज लालित्य।।
(2)
निकल गई है आत्मा, काव्य हुआ निष्प्राण।
नवयुग में गुम हो गये, सतसय्या के बाण।।
(3)
कविता में मिलता नही, भक्ति सा आनन्द।
फिल्मी गानों ने किये, भजन-कीर्तन बन्द।।
(4)
तुलसी, सूर-कबीर की, मीठी-मीठी तान।
निर्गुण-सगुण उपासना, भूल गया इन्सान।।
(5)
प्रेमदिवस के नाम पर, पोषित भ्रष्टाचार।
शिक्षित यौवन कर रहा, खुलकर पापाचार।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छे दोहे.......मैने इन्हे नाम दिया रुप वाणी जो सिर्फ हमारे पूज्य श्री शास्त्री जी की लेखनी से ही निकल सकती है....बहुत ही सुंदर।

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुलसी, सूर-कबीर की, मीठी-मीठी तान।
    निर्गुण-सगुण उपासना, भूल गया इन्सान।।
    बहुत सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर और सार्थक..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. शायद बदलाव के साथ यह सब देखना बदा ही होता है

    उत्तर देंहटाएं
  5. मयंक साहब..

    हम अभिभूत हुए..!!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. अद्भुद दोहे.. आज के कबीर की तरह ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छे सरल सटीक दोहे.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर सरल और प्रासंगिक विचार लिए दोहे....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  9. आदरणीय शास्त्रीजी
    प्रणाम !
    बहुत अच्छे और पूर्णता लिये हुए दोहे हैं , बधाई !

    आप-हम हैं न ! :)
    … और हम जैसे और भी , चिंता की बात नहीं … :)

    शुभकामनाएं ! मंगलकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर दोहे हैं,शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह जी वाह …………गज़ब के दोहे हैं सभी सार्थक और सुन्दर संदेश देते हुये।

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाकई... अभीभूत कर देने वाले दोहे.

    उत्तर देंहटाएं
  13. छन्द-शास्त्र गायब हुए, मुक्त हुआ साहित्य।
    गीत और संगीत से, मिटा आज लालित्य।।
    लेकिन आपकी कलम का लालित्य अभी भी बरकरार है। सभी दोहे लाजवाब हैं बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  14. निकल गई है आत्मा, काव्य हुआ निष्प्राण।
    नवयुग में गुम हो गये, सतसय्या के बाण।...............

    आप जैसे मनीषियों के रहते काव्य निष्प्राण कैसे हो सकता है

    उत्तर देंहटाएं
  15. 'छंद शास्त्र गायब हुए ,मुक्त हुआ साहित्य |

    गीत और संगीत से , मिटा आज लालित्य |

    बहुत सुन्दर दोहे ...आभार शास्त्री जी |

    उत्तर देंहटाएं
  16. है तो चिंता का विषय फिर भी अंधेरी रात के बाद सुबह जरूर आएगी।

    उत्तर देंहटाएं
  17. आज के ज़माने में दोहे पढ़ने को मिले
    यही बहुत बड़ी बात है

    आप का काव्य तो निष्प्राण नहीं हो पाया ,जो सच्चा साहित्यकार है उस के शब्द ,भाव ,अभिव्यक्ति आत्मा तक पहुंचती है
    और आप के दोहे मन को छूते हैं

    उत्तर देंहटाएं

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