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सोमवार, 17 जनवरी 2011

"पड़ रहा पाला है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

कुहासे की चादर,
धरा पर बिछी हुई। 
नभ ने ढाँप ली है, 
अमल-धवल रुई।। 

दिवस हैं छोटे, 
रोशनी मऩ्द है। 
शीत की मार है, 
विद्यालय बन्द है।। 

जल रहे हैं अलाव, 
आँगन चौराहों पर। 
चहल-पहल कम है,
पगदण्डी-राहों पर।। 

सूरज अदृश्य है, 
पड़ रहा पाला है।। 
पर्वत ने ओढ़ लिया, 
बर्फ का दुशाला है।। 
मन में एक आशा है, 
अब बसन्त आयेगा! 
खिल जायेंगे नव सुमन, 
उपवन मुस्कायेगा!! 

31 टिप्‍पणियां:

  1. मन में एक आशा है,
    अब बसन्त आयेगा!
    खिल जायेंगे नव सुमन,
    उपवन मुस्कायेगा!

    बिल्कुल जी अब तो यही आशा है …………बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सूरज अदृश्य है,
    पड़ रहा पाला है।।
    पर्वत ने ओढ़ लिया,
    बर्फ का दुशाला है।।
    ...Bahut khubsurat abhivyakti..badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  3. उत्तरायणी सूर्य के बावजूद यह आलम!

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रतिपल हम भी नवोन्मेष की आशा में जी रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. यथार्थमय सुन्दर पोस्ट
    कविता के साथ चित्र भी बहुत सुन्दर लगाया है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. फुर्सत मिले तो 'आदत.. मुस्कुराने की' पर आकर नयी पोस्ट ज़रूर पढ़े .........धन्यवाद |

    उत्तर देंहटाएं
  7. शीत का सुन्दर चित्रण ..बहुत अच्छी रचना ...बसंत का इंतज़ार है

    उत्तर देंहटाएं
  8. मन में एक आशा है,
    अब बसन्त आयेगा!
    खिल जायेंगे नव सुमन,
    उपवन मुस्कायेगा!!

    बहुत ही सुन्दर चित्रण. बधाई स्वीकार करें.

    रचना

    उत्तर देंहटाएं
  9. मन में एक आशा है,
    अब बसन्त आयेगा!
    खिल जायेंगे नव सुमन,
    उपवन मुस्कायेगा!!

    बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ। पढ़कर प्रकृति पर प्यार आ रहा है। वैसे भी अब बसन्त आ ही गया है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. उत्साह और सकरात्मक ऊर्जा का प्रवाह..!!!! बहुत सुंदर..!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. मन में एक आशा है,
    अब बसन्त आयेगा!
    खिल जायेंगे नव सुमन,
    उपवन मुस्कायेगा!!

    हर अंधेरे के गर्भ से उजाले का जन्म होता है।
    प्रकृति के एक रूप का मनभावन चित्रण।
    आशावादी रचना मन को भा गई।

    उत्तर देंहटाएं
  12. पर्वत ने ओढ़ लिया,
    बर्फ का दुशाला है।
    bahut achchi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  13. वर्फ का दुशाला है पर उफ यह ठण्ड।

    उत्तर देंहटाएं
  14. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना आज मंगलवार 18 -01 -2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/402.html

    उत्तर देंहटाएं
  15. पाला तो पड़ गया बस अब ऐसा दिन आएगा जब हिमपात होगा!

    उत्तर देंहटाएं
  16. क्या कहना शास्त्री जी !
    आपकी रचनाधर्मिता प्रणम्य है |
    अबाध गति से लेखनी चलती रहे , कविता निधि स्वतः मिलती रहेगी |

    उत्तर देंहटाएं
  17. कविता पढ़कर ही ठण्ड लगने लगी।

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत ही सुन्दर कविता । अच्छा चित्रण प्रस्तुत किया है आपने । आभार !

    "गजलहै जान से प्यारा ये दर्दे मुहब्बत"

    उत्तर देंहटाएं
  19. मन में एक आशा है,
    अब बसन्त आयेगा!
    खिल जायेंगे नव सुमन,
    उपवन मुस्कायेगा!
    आद. शास्त्री जी,
    ये आशा सही रही है...
    महीने भर की ऐसी सर्दी से जूझने के बाद अब कुछ राहत मिली है...

    उत्तर देंहटाएं
  20. मन में एक आशा है,
    अब बसन्त आयेगा!
    खिल जायेंगे नव सुमन,
    उपवन मुस्कायेगा!

    बहुत देख ली ठण्ड अब वसंत का हमें भी इंतजार है

    उत्तर देंहटाएं

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