"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 12 जनवरी 2011

"धन्यवाद करता हूँ सबका" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सर्वप्रथम पूज्यपिताश्री घासीराम आर्य एवं माताश्री श्यामवती देवी
के चरणों में प्रणाम करता हूँ!
जिनके आशीषों से मेरा सृजन पुस्तक का रूप ले पाया!
धन्यवाद और आभार के क्रम में
सबसे पहले शुक्रिया अदा करता हूँ
"कर्मनाशा" ब्लॉग के स्वामी डॉ. सिद्धेश्वर सिंह
 (विभागाध्यक्ष-राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खटीमा)  का
जिन्होंने मुझे बार-बार प्रेरित किया कि
"शास्त्री जी अब तो आपकी पुस्तक आनी ही चाहिए!"
आपने मेरी पुस्तक "सुख का सूरज" की भूमिका लिखकर 
मुझे कृतार्थ किया!

अब में धन्यवाद करता हूँ
हिन्दी ब्लॉगिंग के पुरोधा कनाडा प्रवासी
आदरणीय समीरलाल "समीर" जी का
इन्होंने मेरी बाल कविताओं की पुस्तक 
"नन्हें सुमन" की भूमिका लिखकर मुझे धन्य किया!

मैं आरती प्रकाशन लालकुआँ (नैनीताल) की
अपनी बड़ी बहन तुल्या श्रीमती आशा शैली का आभारी हूँ।
जिनके द्वारा मेरी पुस्तकों का प्रकाशन किया गया!

जबलपुर निवासी "मिसफिट-सीधीबात" वाले
आदरणीय "गिरीश बिल्लौरे मुकुल" जी के बारे में कहने के लिए 
तो मेरे शब्द छोटे पड़ जाते हैं। 
इन्होंने न केवल तन्मयता से खटीमा के इस छोटे से कार्यक्रम का और 8 जनवरी की रात में हुई कवि-गोष्ठी का प्रसारण 
जालजगत पर जीवन्त किया 
साथ ही इन्होंने अपने आवश्यक कार्य भी 
अपने कम्प्यूटर पर बैठ कर ही निबटाये 
और अपनेस्थान पर अडिग होकर बैठे रहे! 
मैं आपका आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूँ!

मैं दिल्ली निवासी अपने छोटे भाई तुल्य
आदरणीय अविनाश वाचस्पति का ऋणी हूँ।
जिन्होंने ब्लॉगर मीट के साथ-साथ 
न केवल मेरी पुस्तकों के विमोचन में 
मेरा मुख्यआतिथ्य स्वीकार किया 
बल्कि इस कार्यक्रम का इण्टरनेट के माध्यम से 
लाइव टेलीकास्ट देश-विदेश में करने में 
मुख्यभूमिका का निर्वहन भी किया!

गाजियाबाद निवासी "पद्मावली" ब्लॉग के स्वामी
आदरणीय पद्म सिंह जी के अथक योगदान को 
मैं सदैव स्मरण रक्खूँगा!

"हँसते रहो" ब्लॉग के स्रजनहार
और सशक्त व्यंग्यकार राजीव तनेजा जी का मैं आभारी हूँ!
ये जितने अच्छे लेखक हैं उससे कहीं अधिक खूबसूरत इन्सान भी हैं!

अब में आभार प्रकट करता हूँ "चौखट" के नाम से ब्लॉग लिखने वाले
आदरणीय श्री पवन चन्दन जी का जिनकी वाणी में 
साक्षात् माँ सरस्वती विराजमान रहती है 
इन्होंने  खटीमा पधारकर मेरी चौखट को भी धन्य कर दिया!
"चलते-चलते" धर्मशाला (हिमाचल-प्रदेश) के निवासी
श्री केवलराम ब्लॉगिंग पर पी.एच.डी. कर रहे हैं।
इन्होंने खटीमा पधारकर मुझे गदगद कर दिया।
मैं इनका भी आभारी हूँ!

महामहिम राष्ट्रपति जी के द्वारा सम्मानित
"सरस पायस" के सम्पादक श्री रावेंद्रकुमार रवि जी का नाम भला कैसे विस्मृत किया जा सकता है! जिन्होंने इस कार्यक्रम का संचालन करके इसे भव्यता प्रदान की।

लखनऊ से पधारे आदरणीय रवीन्द्र प्रभात जी ब्लॉगिंग के पुरोधा ही नहीं अपितु अपने आपमें शब्दों का एक कोश हैं। इन्होंने "हिन्दी भाषा और साहित्य में ब्लॉगिंग की भूमिका" विषय पर मुख्य विषय प्रवर्तक के रूप में भाग लेकर मुझ कृतार्थ किया! साथ ही नेपाल यानि विदेश यात्रा का भी आदरणीय रणधीर सिंह सुमन और मनोजकुमार पाण्डेय के साथ आनन्द लिया!

ये हैं लोकसंघर्ष पत्रिका के प्रबन्ध-सम्पादक
आदरणीय रणधीर सिंह सुमन


और ये हैं
मनोजकुमार पाण्डेय जी
ब्लॉगर्स सम्मेलन और विमोचन के कार्यक्रम में
श्री सगीर अशरफ, आनन्दगोपाल सिंह बिष्ट, 
श्रीमती आशा शैली और श्रीमती जमीला अशरफ
कवि शिवशंकर यजुर्वेदी, बरेली

शायर नबी अहमद मंसूरी

श्री सतीश कुमार
फिल्मप्रभाग, पन्तनगर विश्वविद्यालय,

श्री सोहनलाल मधुप, सम्पादक प्रजापति जगत, दिल्ली

श्री देवदत्त प्रसून और डॉ.अशोक शर्मा-पीलीभीत








श्री सतपाल बत्तरा, खटीमा
थारू राजकीय इण्टर कॉलेज में हिन्दी के प्राध्यापक डॉ.गंगाधर राय
जी का मैं आभारी हूँ जिन्होंने अपना अशीर्वचन प्रदानकर मुझे अनुग्रहीत किया!
बड़े भाई तुल्य प्रो.वाचस्पति, वाराणसी का भी मैं बहुत कृतज्ञ हूँ। 
जिन्होंने समय-समय पर मेरा उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
श्री अविनाश वाचस्पति, दिल्ली

अध्यक्षीय उदबोधन करते हुए
डॉ.इन्द्रराम (पूर्व प्राचार्य-स्नातकोत्तर महाविद्यालय, काशीपुर)
मेरी पुस्तकों में अपना शुभकामना सन्देश अंकित करने वाले
श्री अजित वडनेकर, भोपाल
श्री अलबेला खत्री, सूरत
राजस्थानी बालसाहित्यकार दीनदयाल शर्मा जी और डॉ. नूतन गैरोला
बाल साहित्य के पुरोधा डॉ. राष्ट्र बंधु, कानपुर
श्रीमती वन्दना गुप्ता, दिल्ली।
श्री पी,सी.मुदगल (ताऊ रामपुरिया) इन्दौर।
मेरे राजनीतिक गुरू श्रद्धेय पं. नारायणदत्त तिवारी जी
मैं विशेष आभार प्रकट करता हूँ डॉ. ब्रजगोपाल सिंह, 
विभागाध्यक्ष-हिन्दी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय,नोएडा
और साहित्यकार और सम्पादक मदन विरक्त, रामकुमार कृषक, दिल्ली, डॉ.सुनीलदत्त, बस्ती, डॉ.इन्द्र देव माहर, पल्लवी ब्लॉग की संचालिका श्रीमती रजनी माहर,बरेली, डॉ.धर्मवीर सिंह चम्पावत, डॉ.संजीवकुमार, लोहाघाट, अविनाश मिश्रा, पीलीभीत, डॉ.कल्याणसिंह (पूर्व सी.एम.ओ.) डॉ.पी.सी.पाण्डेय (पूर्व-चिकित्सा अधीक्षक) डॉ.बाबूराम अरोड़ा आदि का!
मैं उन सबका भी आभारी हूँ जिन्होंने दुनिया के कोने-कोने में यह कार्यक्रम देखा सुना, अपनी पोस्ट लगाईं, मुझे व्यक्तिगतरूप से भी फोन करके बधाइयाँ दी और समाचार मीडिया, और न्यूज चैनलों के माध्यम से इस कार्यक्रम को विस्तार दिया!
-------
धन्यवाद करता हूँ सबका, सबका ही हूँ आभारी।
अरे यह क्या?!
जिनके प्रकाश से मयंक आलोकित है उन्हें तो मैं भूल ही गया था!
अपने पुत्रों नितिन शास्त्री, विनीत शास्त्री, 
पुत्रवधु- श्रीमती कविता, 
मेरे बाल साहित्य के प्रेरणास्रोत पौत्र प्रांजल, पौत्री प्राची, 
संस्थान में कार्यरत सर्वजीतसिंह (साबी), बिलाल अहमद 
और अपने समस्त स्टाफ को धन्यवाद देता हूँ!
इस पूरे कार्यक्रम की निःशुन्क वीडिओग्राफी और फोटोग्राफी करने वाले 
श्री विनोदकुमार यादव का भी बहुत-बहुत आभारी हूँ!
इस अवसर पर मैं अपनी धर्मपत्नी 
श्रीमती अमर भारती का भी धन्यवाद करता हूँ 
जो मेरी श्वासों में रची बसी हैं और मेरी जिन्दगी है।  
जिनके बिना मेरा कोई भी कार्य पूरा नहीं हो सकता! 
उनके प्रति भी कृतज्ञता प्रकट करता हूँ।

29 टिप्‍पणियां:

  1. बड़ा ही सफल आयोजन, सबका सहयोग और आत्मीयता।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया !!

    सबके प्रति इतने प्रेम से किया गया आभार प्रदर्शन आपकी सहृदयता - सज्जनता का प्रतीक है !

    उत्तर देंहटाएं
  3. aabhar pragat kiya ye to aapka prakriti pradatt bhav hai kintu sarvadhik pasand aaya ki aapne apne mata pita ka aabhar pragat kiya jo aaj ke yug me bahut se oonchai par pahunche log bhol jate hain.badhai bar bar ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस सफल आयोजन और पुस्तक विमोचन के लिए बहुत-बहुत बधाई शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  5. सफल आयोजन और पुस्तक प्रकाशन के लिये बहुत बहुत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस वृहद आयोजन की सफलता पर और पुस्तक विमोचन पर आपको ढेर सारी बधाई ... और इस धन्यवाद सन्देश के लिए भी आपकी आभारी..सादर शुक्रिया .. शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  7. शुक्रगुजारी, आभार या फिर कृतज्ञता ह्रदय की कसौटी होती है , कृतज्ञता तो हम सब को व्यक्त करनी चाहिए आपकी, जो आपने खटीमा जैसे छोटे से कस्बे में एक भव्य और सुन्दर मंच दिया, मंच की गरिमा दी, पवित्रता से परिपूर्ण वातावरण दिया और आथित्य सत्कार में स्नेह,भावनाएं तथा समय का अनमोल सामंजस्य बनाए रखा ! आपकी आत्मीयता और परिवार के प्रत्येक सदस्यों की सुकोमल सहभागिता का कायल हो गया हूँ मैं, मेरा भी आभार स्वीकार करें !

    आपके इस प्रस्तुतीकरण में आपकी आत्मीयता, सहृदयता और विनम्रता स्पस्ट परिलक्षित हो रही आईने की तरह ! ब्लॉग जगत में कुछ लोग ऐसे हैं जिनके विचार तो महान है पर जीवन महान नहीं, कुछ लोग ऐसे हैं जिनके जीवन तो महान है पर विचार नहीं किन्तु दो दिनों के सान्निध्य के पश्चात जो मैंने महसूस किया है उसके आधार पर केवल इतना कह सकता हूँ की आपके विचार और जीवन दोनों महान है, आपको मेरा कोटिश: प्रणाम !

    उत्तर देंहटाएं
  8. गुणगान करें इस ब्‍लॉगिंग का जिसने हमें मिलाया

    हिन्‍दी हैं हम, हिन्‍दी हैं हम, ब्‍लॉगिंग है जहां हमारा

    जय ब्‍लॉगिंग

    जय जय ब्‍लॉगिंग
    जय जय जय ब्‍लॉगिंग

    उत्तर देंहटाएं
  9. आदरणीय शास्त्री जी,

    हम आभारी हैं आपके जो आपने मुझ जैसे नन्हे ब्लोगर को अविनाशजी, रवीन्द्र प्रभात जी, सुमनजी, राजीव तनेजा जी जैसे ब्लॉग जगत के महारथियों से मिलवाया, साथ ही डा सिद्धेश्वर, रावेन्द्र कुमार रवि जैसे प्रबुद्ध साहित्यकार से.....हम तो धन्य हो गए यह सम्मान पाकर !

    उत्तर देंहटाएं
  10. शास्त्री जी
    पुस्तको के विमोचन और सफ़ल आयोजन के लिये आपको बहुत बहुत हार्दिक बधाई । ये सिर्फ़ आपकी लगन, मेहनत और निष्ठा का ही परिणाम है जो ये आयोजन इतना सफ़ल रहा और कामना करती हूँ हर साल आप इसी तरह के आयोजन करवाते रहें। मुझे जैसी नाचीज़ को भी याद रखा इसके लिये आपकी दिल से आभारी हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. इस सफल आयोजन और इसके देश व दुनिया में जीवन्त प्रसारण पर आपको हार्दिक बधाईयां...

    उत्तर देंहटाएं
  12. सफल आयोजन और पुस्तक प्रकाशन पर हार्दिक बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  13. इस सफल आयोजन के लिए बहुत बहुत बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस सफल आयोजन के लिए बहुत बहुत बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं
  15. इस सफल आयोजन और पुस्तक विमोचन के लिए बहुत-बहुत बधाई शास्त्री जी !
    काश हम भी आ पाते ?

    उत्तर देंहटाएं
  16. शुक्रिया तो शास्त्री जी हमें आपका करना चाहिए कि आप ही की वजह से हम सब इस आयोजन में सहभागी बन सके ...

    उत्तर देंहटाएं
  17. शास्त्री जी, इस सफल आयोजन और पुस्तक विमोचन के लिए एक बार फिर बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  18. शास्त्री जी ,
    इस सफल आयोजन और आपकी दो पुस्तकों के विमोचन के लिए आपको हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  19. आयोजन के सफलता की बधाई.
    शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  20. सफल आयोजन और पुस्तकों के विमोचन के लिए आपको हार्दिक बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  21. पुस्तक विमोचन के लिए आपको ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं -

    उत्तर देंहटाएं
  22. आभारी तो आपका हूं मौका जो दिया

    उत्तर देंहटाएं
  23. मयंकजी, लम्बे समय से ब्लोगिंग पर परिस्थिति वश समय न दे पाने के कारण तथा खटीमा न आ सकने से सम्पर्क का आभाव खलता रहा
    लगभग नित्य ब्लॉग पर समय दे कर पुनःसब ब्लॉग साहित्यकारों से जुड़ने का प्रयास जारी है | आज इस पृष्ठ कोजब देखा तो सारी यादें तरोताजा हो गईं|पुनः साहित्य सेवा का अवसर दें |

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails