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रविवार, 6 नवंबर 2011

"महक उठी क्यारियाँ चमन में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बहार आने से खिल उठा है,
हमारे उपवन का कोना-कोना।
महक उठी क्यारियाँ चमन में,
चहक रहा है चमकता सोना।।

चमक रहा है गगन पटल पर,
सात-रंगी धनुष निराला,
बरस रहे हैं बदरवा रिम-झिम,
निगल रहे हैं दिवस उजाला,
नजर जमाने की लग न जाए,
लगाया नभ पर बड़ा डिठोना।
महक उठी क्यारियाँ चमन की,
चहक रहा है चमकता सोना।।

ठुमक रहे हैं मयूर वन में,
दमक रही दामिनी गरज कर,
चिहुँक रहे हैं खग मस्ती में,
थिरक-थिरककर-लरज-लरजकर।
झूम रहे हैं तरुवर खुश हो,
फूलों का बिछ गया बिछौना।
महक उठी क्यारियाँ चमन की,
चहक रहा है चमकता सोना।।

30 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर गीतमय रचना ....मन को खिलाती हुई ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. सौन्दर्यमयी प्रकृति का सुन्दर चित्रण।

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रकृति की सुंदरता का सहज चित्रण .. बहुत सुंदर !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut sundar pyare shabd-bhaav...
    नजर जमाने की लग न जाए,
    लगाया नभ पर बड़ा डिठोना।
    shubhkamnaayen.

    उत्तर देंहटाएं
  5. ठुमक रहे हैं मयूर वन में,
    दमक रही दामिनी गरज कर,
    चिहुँक रहे हैं खग मस्ती में,
    थिरक-थिरककर-लरज-लरजकर।
    सुंदर प्रकृति चित्रण।

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्राकृतिक सुन्दरता का सुन्दर चित्रण्।

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रकृति की सुंदरता का अहसास कराती रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा आज दिनांक 07-11-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  9. लयबद्ध काव्यात्मक सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  10. यूँ ही महकता रहे क्यारी..

    उत्तर देंहटाएं
  11. purn prakriti ko apni kavita me samahit kar liya hai apne..
    bahut hi sundar rachana..

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर रचना! बधाई!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. प्रकृति का बहुत सुन्दर चित्रण...

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुंदर उपवन की खूबसूरत रचना ....

    उत्तर देंहटाएं
  15. चहका रहा है चहकता सोना|

    बहुत हि सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं

  16. दिनांक 13/01/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ऎसा क्यूँ हो जाता है......हलचल का रविवारीय विशेषांक.....रचनाकार...समीर लाल 'समीर' जी

    उत्तर देंहटाएं

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