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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

"दल उभरता नहीं, संगठन के बिना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


स्वर सँवरता नहीं, आचमन के बिना।
पग ठहरता नहीं, आगमन के बिना।।

देश-दुनिया की चिन्ता, किसी को नहीं,
मन सुधरता नहीं, अंजुमन के बिना।

मोह माया तो, दुनिया का दस्तूर है,
सुख पसरता नहीं, संगमन के बिना।

खोखली देह में, प्राण कैसे पले,
बल निखरता नहीं, संयमन के बिना।

क्या करेगा यहाँ, अब अकेला चना,
दल उभरता नहीं, संगठन के बिना।

रूप कैसे खिले, धूप कैसे मिले?
रवि ठहरता नहीं है, गगन के बिना।

31 टिप्‍पणियां:

  1. वाह …………बहुत ही खूबसूरत भावो को संजोया है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. क्या करेगा यहाँ, अब अकेला चना,
    दल उभरता नहीं, संगठन के बिना।

    क्या कहने, बहुत सुंदर।

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. खोखली देह में, प्राण कैसे पले,
    बल निखरता नहीं, संयमन के बिना।

    Great lines...Awesome !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  5. देश-दुनिया की चिन्ता, किसी को नहीं,
    मन सुधरता नहीं, अंजुमन के बिना।
    मोह माया तो, दुनिया का दस्तूर है,
    सुख पसरता नहीं, संगमन के बिना।
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! भावपूर्ण प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  6. “रूप” कैसे खिले, धूप कैसे मिले?
    रवि ठहरता नहीं है, गगन के बिना।
    वाह!!!बहुत ही सुंदर गीत ....बहुत खूब लिखा है आपने समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह बहुत ही खबसूरत..गुनगुनाने लायक रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह!!! बहुत बहुत बधाई ||

    प्रभावी कविता ||

    सुन्दर प्रस्तुति ||

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्रभावशाली,सुंदर पोस्ट,..

    उत्तर देंहटाएं
  10. खोखली देह में, प्राण कैसे पले,
    बल निखरता नहीं, संयमन के बिना ।

    और संयमन होना भी चाहिए जिन्दगी में हर जगह..!

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह वाह वाह
    आप की टिप्पणियाँ भी शानदार होती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  12. भवपूर्ण रचना,सामायकिक हालातों को दर्शाती,
    साथ ही आज की चर्चा के लिन्क्स भी सटीक हैं.
    सादर धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  13. खोखली देह में, प्राण कैसे पले,
    बल निखरता नहीं, संयमन के बिना।

    ....बहुत सार्थक और सुंदर प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही सुंदर आज के हालत का सटीक चित्रण...
    लय पूर्ण गुनगुनाने काबिल बेहतरीन पोस्ट...
    नए पोस्ट'प्रतिस्पर्धा'में इंतजार है,...

    उत्तर देंहटाएं
  15. खोखली देह में, प्राण कैसे पले,
    बल निखरता नहीं, संयमन के बिना।

    वाह !!!! अतिसुंदर भाव....

    उत्तर देंहटाएं
  16. देश-दुनिया की चिन्ता, किसी को नहीं,
    मन सुधरता नहीं, अंजुमन के बिना।

    सार्थक प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं

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