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बुधवार, 16 नवंबर 2011

"ज़िन्दगी खूब खिलखिलाती है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


जब भी पुरवा बयार आती है
ज़िन्दगी खूब खिलखिलाती है

जब भी बादल फलक घिरते हैं
याद प्रीतम की तब सताती है

जब भी भँवरे गुहार करते हैं
तब कली ग़ुल सा मुस्कराती है

सर्दियाँ शीत जब उगलतीं हैं
चाँदनी भी कहर सा ढाती है

ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
मंज़िलें हाथ नहीं आती है

रूप रहता नहीं सलामत है
धूप यौवन की ढलती जाती है

28 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह बहुत ही मनभावन रचना ……………सीधा दिल को छू गयी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है
    वाह ...बहुत ही खूब कहा है ..।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सब ढलकर ढह जाना है,
    जीवन बढ़ते जाना है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है
    bahut khoob

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर रचना बढ़िया पोस्ट..

    उत्तर देंहटाएं
  6. “रूप” रहता नहीं सलामत है
    धूप यौवन की ढलती जाती है

    ek dam sach.

    sunder abhivyakti.

    उत्तर देंहटाएं
  7. ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है

    यही ज़िन्दगी का मज़ा है...

    उत्तर देंहटाएं
  8. पुरवा,भंवरे और शीत तो ठीक हैं। बस,बादल समस्या हैं आपके लिए!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूब सर!
    ----
    कल 18/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  10. धूप यौवन की ढलती जाती है-----bahut khub !

    उत्तर देंहटाएं
  11. ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है
    bahut hi sundar sir....

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही खुबसूरत अभिवयक्ति....सुन्दर ग़ज़ल....

    उत्तर देंहटाएं
  13. ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है...

    खूबसूरत रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  14. ज़िन्दगी भर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है
    मंजिलें हाथ आ जायें तो सफ़र ही ख़त्म...!
    सुन्दर प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही सुन्दर रचना बधाई हो !
    पहली बार आपके ब्लॉग पे आया हूँ और
    आना सार्थक रहा !
    सदस्य बन रहा हूँ !
    आपको मेरे "जीवन पुष्प " ब्लॉग पे हार्दिक स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  16. ज़िन्दगी सफर है....
    मंज़िलें कब हाथ आती है....!

    उत्तर देंहटाएं
  17. वह वह शास्त्री जी ...हलके फुल्के शब्दों में सन्देश देती रचना ...

    उत्तर देंहटाएं

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