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गुरुवार, 24 नवंबर 2011

"हमारे नेता महान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



रोटी है,
बेटी है,
बँगला है,
खेती है,

घपलों में 
घपले हैं,
दिल काले हैं
कपड़े उजले हैं,

उनके भइया हैं,
इनके साले हैं,
जाल में फँस रहे,
कबूतर भोले-भाले हैं,

गुण से विहीन हैं
अवगुण की खान हैं
जेबों में रहते
इनके भगवान हैं

इनकी दुनिया का
नया विज्ञान है
दिन में इन्सान हैं
रात को शैतान हैं

परदा डालते हैं
भाषण से घोटालों पर
तमाचे भी पड़ते हैं
कभी-कभी गालों पर

आदत हो गई है
लातों के भूतों को
खाते हैं यदा-कदा
जनता के जूतों को

न कोई धर्म है
न ही ईमान है
मुफ्त में करते
नही अहसान हैं

हर रात को बदलते
नये मेहमान है
हमारे देश के नेता
सचमुच महान हैं!

20 टिप्‍पणियां:

  1. न कोई धर्म है
    न ही ईमान है
    मुफ्त में करते
    नही अहसान हैं
    yatharth ko batati hui saarthak post .bahut badhaai aapko .

    उत्तर देंहटाएं
  2. मयंक जी नमस्कार, बहुत अच्छे गुणो से नवाजा है सच है--न ही ईमान है---मुफ्त मेकरते नही एहसान है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. नेताओं के चरित्र को आपने सरल शब्दों में सुन्दर धनद से बयाँ किया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपने आज के नेतों का सरल शब्दों में सटीक चित्रण प्रस्तुत किया है.....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  5. wah ...
    netao ki tarif me apne bahut gajab likh diya hai...
    bahut sundar rachana hai....

    उत्तर देंहटाएं
  6. चरित्र चित्रण कर दिया आपने कविता के माध्यम से

    उत्तर देंहटाएं
  7. आजकल के नेता, 'नेता' नहीं 'लेता' हैं....
    अच्‍छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी रचना का यह अंदाज़ भी भाया।

    उत्तर देंहटाएं
  9. शास्त्री जी,
    बहुत सुंदर सरल शब्दों नेताओं का गुणगान किया
    रचना पसंद आई ,...
    मेरे पोस्ट पर आइये स्वागत है,...

    उत्तर देंहटाएं
  10. सच्चा सच्चा चित्र खींच डाला...बेहतरीन!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. हास्य और व्यंग्य एक साथ - बोले तो एक पर एक फ्री

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत खूब शास्त्री जी , मगर मैं इनका गुणगान सरल शैली में करना पसंद करता हूँ ;
    भ्रष्ट हैं, बेईमान है , चोर हैं लुच्चे है !
    हमारे देश के नेता, सा..सब टुच्चे है !!

    उत्तर देंहटाएं
  13. एकदम करारा...
    सरदार जी के हाथ की तरह
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  14. एक बेहद शानदार करारा प्रहार करती रचना के लिये हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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