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बुधवार, 23 नवंबर 2011

‘‘हमसफर बनाइए’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


ज़िन्दगी के रास्तों पे कदम तो बढ़ाइए।
इस सफर को नापने को हमसफर बनाइए।।

राह है कठिन मगर लक्ष्य है पुकारता,
रौशनी से आफताब मंजिलें निखारता,
हाथ थामकर डगर में साथ-साथ जाइए।

ज्वार का बुखार आज सिंधु को सता रहा,
प्रबल वेग के प्रवाह को हमें बता रहा,
कोप से कभी किसी को इतना मत डराइए।

काट लो हँसी-खुशी से, कुछ पलों का साथ है,
चार दिन की चाँदनी है, फिर अँधेरी रात है,
इन लम्हों को रार में, व्यर्थ मत गँवाइए।

पुंज है सुवास का, अब समय विकास का,
वाटिका में खिल रहा, सुमन हमारी आस का,
सुख का राग, आज साथ-साथ गुनगुनाइए।

25 टिप्‍पणियां:

  1. काट लो हँसी-खुशी से, कुछ पलों का साथ है,
    चार दिन की चाँदनी है, फिर अँधेरी रात है,
    इन लम्हों को रार में, व्यर्थ मत गँवाइए।

    पता नही क्यो इंसान इतनी सी बात नही समझ पाता……………और ज़िन्दगी झगडे फ़सादो मे गुजार देता है…………सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पुंज है सुवास का, अब समय विकास का,
    वाटिका में खिल रहा, सुमन हमारी आस का,
    सुख का राग, आज साथ-साथ गुनगुनाइए

    बहुत सुन्दर और प्रेरक प्रस्तुति है,शास्त्री जी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. काट लो हँसी-खुशी से, कुछ पलों का साथ है,
    चार दिन की चाँदनी है, फिर अँधेरी रात है,
    इन लम्हों को रार में, व्यर्थ मत गँवाइए।

    पता नही क्यो इंसान इतनी सी बात नही समझ पाता……………और ज़िन्दगी झगडे फ़सादो मे गुजार देता है…………सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. यूँ ही कट जायेगा सफर साथ चलने से...

    उत्तर देंहटाएं
  5. के मंज़िल आएगी नज़र साथ चलने से .... :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. चार दिन की चाँदनी है, फिर अँधेरी रात है,
    इन लम्हों को रार में, व्यर्थ मत गँवाइए।
    सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

    बधाई महोदय ||

    dcgpthravikar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुख का राग, आज साथ-साथ गुनगुनाइए।

    बहुत सुन्दर गीत सर...
    सादर बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर बौध्गाम्य प्रस्तुति| बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  10. मंजिल इतनी सुन्दर हो तो अकेले भी तैयार रहते हैं ।
    बड़ी सार्थक बात कही है अपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुख के राग की ही तलाश रहती है। बहुत अच्‍छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  12. काट लो हँसी-खुशी से, कुछ पलों का साथ है,
    चार दिन की चाँदनी है, फिर अँधेरी रात है,
    इन लम्हों को रार में, व्यर्थ मत गँवाइए।
    बहुत सुंदर सन्देश देती हुई सार्थक रचना /सुंदर शब्दों से लिखी हुई /बधाई आपको /

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-708:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  14. ज़िन्दगी के रास्तों पे कदम तो बढ़ाइए।
    इस सफर को नापने को हमसफर बनाइए

    bahut sundar

    उत्तर देंहटाएं
  15. इन लम्हों को रार में, व्यर्थ मत गँवाइए।...main koshish karungi....bahut acchi seekh deti rachna

    उत्तर देंहटाएं
  16. ज्वार का बुखार आज सिंधु को सता रहा,
    प्रबल वेग के प्रवाह को हमें बता रहा,
    कोप से कभी किसी को इतना मत डराइए।

    अपने ही कोप से कभी खुद भी डर जाइए....
    बहुत खूब....

    उत्तर देंहटाएं

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