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रविवार, 13 नवंबर 2011

"आज बन गये सब व्यापारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



आपाधापी की दुनिया में,
मतलब की सब दुनियादारी।
दुनियादारी के मेले में,
आज बन गये सब व्यापारी।।
बिना काम के कोई किसी को,
बिल्कुल याद नहीं करता है,
अमृत पाने के लालच में ,
सागर का पानी भरता है,
स्वार्थ पड़ा है सब पर भारी।
दुनियादारी के मेले में,
आज बन गये सब व्यापारी।।
मानवता के इस दंगल में,
केवल दाँव-पेंच चलते हैं,
धनवानों की घुड़सालों में,
बलशाली घोड़े पलते हैं,
पश्चिम की असभ्य आँधी से,
पूरब की पुरवा है हारी।
दुनियादारी के मेले में,
आज बन गये सब व्यापारी।।
सजे-धजे परिधान छोड़कर,
अंगों का हो रहा प्रदर्शन,
सोच हुई है कितनी बौनी,
घटा रूप” का सब आकर्षण,
भूल गये हैं शब्द लाज का,
फैशन की पनपी बीमारी।
दुनियादारी के मेले में,
आज बन गये सब व्यापारी।।

29 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बहुत ही सुन्दर रचना लिखा है! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  2. धनवानों की घुड़सालों में,
    बलशाली घोड़े पलते हैं

    वाह!!! क्या बात है. बिल्कुल सच है कि
    सोच हुई है कितनी बौनी,
    घटा “रूप” का सब आकर्षण,

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस व्यापार में हम सब वस्तु बन गये हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सब ओर स्वार्थ हावी है और भावनाओं की खरीद फ़रोख़्त हो रही है!!

    बहुत अच्छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  5. व्यापार ने मानवीय सरोकारों को धूमिल सा कर दिया है!
    सटीक प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  6. दुनियादारी के मेले में,
    आज बन गये सब व्यापारी।।

    -सच कहा...बेहतरीन रचना!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. दुनियादारी के मेले में सब बन गये व्यापारी ...
    यही सच है !

    उत्तर देंहटाएं
  8. क्या बात है ! सौ टके की एक बात...जीवन व्यापर तो है ,परन्तु सच्चा सौदा ,खरा सौदा हम नहीं कर प् रहे हैं जी ,बस उलझन इसी बात की है .......मुखर अभिव्यक्ति को आदर जी /

    उत्तर देंहटाएं
  9. बिना मतलब के कुछ नहीं है वास्‍तव में यह दुनिया एक बाजार बन गयी है। बहुत अच्‍छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बिलकुल सही बात कही है सर!

    ----

    कल 15/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  11. bilkul sahi vyang hai swarth parton ki duniya me sabhi rishte naate khokhle ho gaye hain.bahut achcha likha.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर भावों से सजी कविता...धन्यवाद अंकल!!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस ही व्यापार पर मैंने भी एक पोस्ट लिखी है। समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर अपप्का स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत बढ़िया कविता... सचमुच आज हम व्यापारी हो गए हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  16. सजे-धजे परिधान छोड़कर,
    अंगों का हो रहा प्रदर्शन,
    सोच हुई है कितनी बौनी,
    घटा “रूप” सब आकर्षण,
    सटीक ब्यान

    उत्तर देंहटाएं
  17. शास्‍त्री जी, इसमें कोई दो-राय नहीं कि आप सिद्धहस्‍त कवि हैं। आप जैसा पारंगत कवि ब्‍लॉग जगत में खोज पाना सम्‍भव नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  18. शास्‍त्री जी, नागेश द्वारा खड़े किये गये विवाद पर सम्‍मानित रचनाकार डॉ0 मोहम्‍मद अरशद खान की विस्‍तृत टिप्‍पणी आ गयी है, जिसे पढ़कर यह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि इसे किस प्रकार गढ़ा गया और बढ़ाया गया। उस टिप्‍पणी को यहाँ पर पढ़ा जा सकता है। चूंकि उस विवाद से आप शुरू से जुडे रहे हैं, इसलिए सूचनार्थ आपको यह जानकारी दी जा रही है, जिससे आप सम्‍पूर्ण वस्‍तुस्थिति से अवगत हो सकें।

    उत्तर देंहटाएं
  19. द होल थिंग इज दैट कि भैया सबसे बड़ा रुपैया...

    उत्तर देंहटाएं
  20. आज बन गए सब व्यापारी...

    सचमुच...
    बहुत सुन्दर रचना सर...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  21. आपको पढने का एक अलग सुख है..

    मतलब की इस दुनिया में सभी बन गए व्यापारी..
    सुंदर भाव

    उत्तर देंहटाएं
  22. सही कहा है आपने इस कविता के माध्यम से बहुत ही गहरी और आज की वास्तविकता कह दिया है आपने |
    बहुत ही सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं

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