श्वेत कुहासा-बादल काले। मौसम के हैं ढंग निराले।। भुवन भास्कर भी सर्दी में, ओढ़ रजाई सो जाता है, तन झुलसानेवाला उसका, रौद्ररूप भी खो जाता है, सर्द हवाओं के झोंको ने, तेवर सब ढीले कर डाले। मौसम के हैं ढंग निराले।। जैसे ही होली जल जाती, मास चैत्र का आ जाता है, तब निर्मल नभ की गोदी में रवि तरुणाई पा जाता है, गर्मी से राहत देने को, घूम रहे पंखे मतवाले। मौसम के हैं ढंग निराले।। वर्षा की ऋतु आ जाने पर, तन से बहता बहुत पसीना, शीलन और उमस के कारण, तब मुश्किल हो जाता जीना, चौपालों पर तब ठलुओं ने, ताश और शतरंज निकाले। मौसम के हैं ढंग निराले।। |
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वाह!!!
जवाब देंहटाएंमौसम के निराले ढंग...और ये निराली कविता...
बहुत सुन्दर.
मौसम के ढंग निराले हैं
जवाब देंहटाएंचाचा ने कह डाले हैं
भुवन भास्कर जब हैं आते
मेरे चाचू परेशन हो जाते
ओढ़ रज़ाई सो जाते हैं
जाड़ा बहुत सतावे हैं
होली के आते ही चाचा
हो जाते मतवाले हैं
चाची संग खेले होली
बच्चो को डाट पिलावे हैं
मौसम के रंग निराले हैं
सावन का महीना
चाचा जी को बीमार कर देता हैं
चाची चली जाती हैं मायके
चाचा का ख़याल कोई ना रखता हैं
तब चाचा जी ने नये खेल निकाले हैं
ताश और शतरंज से
अपना दिल बहला डाले हैं
मौसम के हैं ढंग निराले।।
फिलहाल तो ठिठुराती ठंड है
जवाब देंहटाएंसुंदर गीत
्मौसम के ढग तो होते ही निराले हैं।
जवाब देंहटाएंआजकल तो ठण्ड ने बहुत ही कंपा दिया है.
जवाब देंहटाएंरजाई में दुबककर ही लेपटॉप पर पोस्ट पढी जा रही है। बढिया है कविता।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर ऋतु गीत.... बहुत बढ़िया...
जवाब देंहटाएंsundar
जवाब देंहटाएंsamayanukool rachna bahut sundar.aaj sardi me subah subah esa hi najara dekha.
जवाब देंहटाएंgajab ki prastuti ..
जवाब देंहटाएंजीवन का असली रस परिवर्तन में ही है।
जवाब देंहटाएंचित्र देखकर ठिठुर रहे हम..
जवाब देंहटाएंआज के मौसम पर लिखी गई सटीक लेखनी ...बहुत खूब
जवाब देंहटाएंयही तो हम सब का सौभाग्य है जो हम ऐसे देश मे हैं जहां इतने बहुरंगी मौसमों का मजा है।
जवाब देंहटाएंसब मौसम में सर्दियाँ ही सबसे निराली हैं .
जवाब देंहटाएंबढ़िया गीत.
क्या बात है सर! मौसम भी पराया हो गया है शर्दी की बाजार में ,सुखद,रोचक रचना .....
जवाब देंहटाएंsateek v samyik prastuti .aabhar .
जवाब देंहटाएंअद्भुत वर्णन है मौसम का..कितनी सुन्दरता से किया है ..बधाई..
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया रचना
kalamdaan.blogspot.com
सच में मौसम के रंग निराले होते हैं।
जवाब देंहटाएंहोली के आते ही चाचा
जवाब देंहटाएंहो जाते मतवाले हैं
चाची संग खेले होली
बच्चो को डाट पिलावे हैं
मौसम के रंग निराले हैं
वाह जी वाह!
चाची के संग होली
और बच्चों को डाट
यह कोई अच्छी नही है बात.
शुक्र है अभी तो सर्दी है.
अब तो सुधर जाओ चाचा.