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गुरुवार, 26 जनवरी 2012

"ज़िन्दग़ी में बड़े झमेले हैं" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


घर हमारे बने तबेले हैं
ज़िन्दग़ी में बड़े झमेले हैं

तन्त्र से लोक का नहीं नाता
हर जगह दासता के मेले हैं

बीन कचरा बड़ा हुआ बचपन
नौनिहाल खींच रहे ठेले हैं

है निठल्लों को रोज़गार यहाँ
शिक्षितों के लिए अधेले हैं

अब विरासत में सियासत पाकर
 ख़ानदानों ने दाँव खेलें हैं

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपने सच कहा,
    बहुत सुंदर प्रस्तुति,
    WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. हंस चुग रहा दाना दुनका, कौवा मोती खाता है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. जिंदगी कैसी है पहेली हाय....

    उत्तर देंहटाएं
  4. yahi hai jindgi ka sach aur isako jeena aur bhi kathin hai jab desh kee bagdor aise logon ke hath men ho jinhe sirph aur sirph kursi dikhaai de rahi ho.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मुबारक यह गण निरपेक्ष तंत्र .
    तन्त्र से लोक का नहीं नाता
    हर जगह दासता के मेले हैं

    उत्तर देंहटाएं
  6. inhi ka hk to yhan yaro
    kha gye neta hi akele hain
    unhe kya hai pta nhi sara inhi ke postr me chahere hain
    onhi ke sr paanv ko rkh kr
    bne vo mntri chahete hain

    bhut 2 bdhai

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत संजीदा रचना है और चित्र भी ....
    हकीकत बया करती सुन्दर रचना है

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (२८) मैं शामिल की गई है /आप आइये और अपने सन्देश देकर हमारा उत्साह बढाइये /आप हिंदी की सेवा इसी मेहनत और लगन से करते रहें यही कामना है /आभार /

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहतरीन ,
    आभार !!

    See :
    ब्लॉगर्स मीट वीकली (28) God in Ved & Quran
    http://hbfint.blogspot.com/2012/01/28-god-in-ved-quran.html

    उत्तर देंहटाएं
  10. अब विरासत में सियासत पाकर
    ख़ानदानों ने दाँव खेलें हैं
    bahut behtreen jabardast kataksh mara hai shastri ji.rachna bahut shreshth hai.

    उत्तर देंहटाएं

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