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शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

"अब चमन, अपना ठिकाना हो गया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


दिल हमारा अब दिवाना हो गया है।
फिर शुरू मिलना-मिलाना हो गया है।।

हाथ लेकर चल  पड़े हम साथ में,
प्रीत का मौसम, सुहाना हो गया है।

इक नशा सा, जिन्दगी में छा गया,
दर्द-औ-गम, अपना पुराना हो गया है।

सब अधूरे् स्वप्न पूरे हो गये,
मीत सब अपना, जमाना हो गया है।

दिल के गुलशन में बहारें छा गयीं,
अब चमन, अपना ठिकाना हो गया है।

तार मन-वीणा के, झंकृत हो गये,
सुर में सम्भव गीत गाना हो गया है।

मन-सुमन का रूप अब खिलने लगा,
बन्द अब, आँसू बहाना हो गया है।

26 टिप्‍पणियां:

  1. आपका गीत प्यारा सा, हमें गुनगुनाना हो गया है

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  2. //इक नशा सा, जिन्दगी में छा गया,
    दर्द-औ-गम, अपना पुराना हो गया है।

    behtareen ghazal sir.. behtareen.. :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. हाथ लेकर चल पड़े हम साथ में,
    प्रीत का मौसम, सुहाना हो गया है।


    इक नशा सा, जिन्दगी में छा गया,
    दर्द-औ-गम, अपना पुराना हो गया है।
    वाह-वाह... रूमानी हो गए और कर भी दिया !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर गजल शास्त्री जी । पढ़कर चित्त प्रसन्न हो गया ।
    आ गये जो आपके इस ब्लॉग में, हृदय का "दीपक" जलाना हो गया ।

    आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर फूलो को देख..मन हमारा भी प्रसन्न होगया..

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिल हमारा अब दिवाना हो गया है।
    फिर शुरू मिलना-मिलाना हो गया है।।

    हाथ लेकर चल पड़े हम साथ में,
    प्रीत का मौसम, सुहाना हो गया है।

    वसन्त का रंग चढना शुरु हो गया है………बहुत खूबसूरत प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत खूब! वसन्त का प्रभाव झलकने लगा है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही अच्छा लगा कविता का ये मूड...

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुंदर चित्र से सजा यह पोस्ट सुहाना हो गया है|

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुंदर रचना ...कृपया नयी-पुरानी हलचल पर पधारें ...आज आपकी कविता का लिंक वहां पर है ...

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह ...बहुत ही बढि़या भाव संयोजन ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. खुशिया झलकती है आपकी इस रचना से..
    बेहतरीन प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  13. वाह - बहुत उम्दा ग़ज़ल है सर :)

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपका गीत बहुत अच्छा लगा

    उत्तर देंहटाएं
  15. बसंत ऋतू आई ..बहार आई .. खूबसूरत गज़ल ..
    बसंत पंचमी की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  16. मन-सुमन का “रूप” अब खिलने लगा,
    बन्द अब, आँसू बहाना हो गया है।
    मुबारक यह मदनोत्सव बसंत.

    उत्तर देंहटाएं
  17. हाथ लेकर चल पड़े हम साथ में,--
    एसा लगता है कि कोई कटा हुआ हाथ लेकर हम साथ चलपडे..

    - चल पडे हम हाथ लेकर हाथ में.. ..सही रहेगा

    उत्तर देंहटाएं

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