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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

"सहमा सा मजदूर-किसान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

खादी-खाकी दोनों में ही, बसते हैं शैतान।
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

तन भूखा है, मन रूखा है खादी वर्दी वालों का,
सुर तीखा है, उर सूखा है खाकी वर्दी वालों का,
डर से इनके सहमा-सहमा सा मजदूर-किसान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

खुले साँड संसद में चरते, करते हैं मक्कारी,
बेकसूर थानों  में मरते, जनता है दुखियारी,
कितना शानदार नारा है, भारत बहुत महान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

माली लूट रहे हैं बगिया को बन करके सरकारी,
आलू,दाल-भात महँगा है, महँगी हैं तरकारी,
जीने से मरना महँगा है, आफत में इन्सान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

मानवता-मर्यादा घुटती है खादी के बानों मे,
अबलाओं की लज्जा लुटती है सरकारी थानों में,
खादी-खाकी की केंचुलियाँ, सचमुच हैं वरदान!
अचरज में है हिन्दुस्तान! 
अचरज में है हिन्दुस्तान!!

17 टिप्‍पणियां:

  1. सही में ही ये केंचुल की तरह प्रयोग हो रहे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह वाह शास्त्री जी...
    बहुत बढ़िया व्यंग...मज़ा आया पढ़ कर...और सच्चाई पर दुःख भी हुआ.

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह ! बहुत खूब ..
    मेरी ओर से ..
    मात पिता कठपुतली हो गए ,बिका परिवारों का ईमान
    बड़े लाड से पाला जिनको पाल रहे उन्ही की संतान
    आँखों का पानी ढल गया , शर्मसार हर इंसान
    अचरज में है हिन्दुस्तान ...
    अचरज में है हिन्दुस्तान ...
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज तो बहुत ही कडवा सच लिख दिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. तर्कसंगत समकालीन परिस्थितियों का चित्रण।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मानवता-मर्यादा घुटती है खादी के बानों मे,
    अबलाओं की लज्जा लुटती है सरकारी थानों में,
    खादी-खाकी की केंचुलियाँ, सचमुच हैं वरदान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!!
    आज तो बहुते करारी खरी खरी बात कहिन,शास्त्री जी.
    पढ़ के मजा आय गवा,आप के ई रचना बहुते अच्छा लाग हमका,बहुते बहुत बधाई,..शास्त्री जी आपका,...welcom to new post --"काव्यान्जलि"--

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  7. चोर लुटेरे भी हैं अपने भाग्य विधाता..
    पीड़ित चौराहे पे पिट के न्याय है पाता..
    हम तुम आँख चुराते देखे, बनते हैं अनजान..
    अचरज में है हिन्दुस्तान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!!......(Manoj)

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत बढ़िया व्यग्य लिखा आपने शास्त्री जी । आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. तन भूखा है, मन रूखा है खादी वर्दी वालों का,
    सुर तीखा है, उर सूखा है खाकी वर्दी वालों का,
    डर से इनके सहमा-सहमा सा मजदूर-किसान!
    kamaaaal ka likha hai shar akshar satya.ati sundar.

    उत्तर देंहटाएं
  10. खुले साँड संसद में चरते, करते हैं मक्कारी,
    बेकसूर थानों में मरते, जनता है दुखियारी,
    कितना शानदार नारा है, भारत बहुत महान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!
    अचरज में है हिन्दुस्तान!!
    Mere man kee baat kah di aapne shashtriji :)

    उत्तर देंहटाएं
  11. सच को उजागर करती सार्थक प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं

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