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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

"दोहे-ज़ालजगत पर कर्म" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


भाँति-भाँति के हो रहे, ज़ालजगत पर कर्म।
शब्द-शब्द में है छिपा, धर्म-कर्म का मर्म।१।

अंकित होते हैं यहाँ, जीवन के अनुभाव।
कुछ शीतल से लेप हैं, कुछ देते हैं घाव।२।

भरा पिटारा ज्ञान का, देखो इसको खोल।
इस गठरी में भरे हैं, शब्द बहुत अनमोल।३।

सजा हुआ इस हाट में, सभी तरह का माल।
घूम-घूम कर मुफ्त में, भर लो खाली थाल।४।

उड़नतश्तरी से हुई, दूर देश में बात।
सुविधा अन्तर्जाल की, दे जाती सौगात।५।

30 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉगजगत का जाल ढाकता सकल जगत को।

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  2. दोहों की सौगात मिली फिर ब्लॉगजगत को।

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  3. बहुत बढ़िया..!
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. इन्टरनेट और ब्लॉग दोनों ही बड़े महत्वपूर्ण हो गए हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह...
    सही है इंटरनेट सच में बहुत बड़ी सौगात है..
    शुद्ध हिंदी में तो और भी चमत्कारिक लगता है :-)

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  6. भरा पिटारा ज्ञान का, देखो इसको खोल।
    इस गठरी में भरे हैं, शब्द बहुत अनमोल।

    सच कहा है... किन्तु अभी ब्लोगजगत शिशु-अवस्था मे है... लोग पढ़ते कम बस फोलोवर्स और टिप्पणियों की चिंता मे लगे रहते हैं...
    ब्लोगजगत पे मुझे तो लगता है पाठक कम हैं ब्लॉगर ज्यादा हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  7. ख़बरों और रचनाओं से भेंट कराता है यह अंतरजाल | बहुत खूब लिखा है आपने |

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति

    शुक्रवारीय चर्चा मंच पर

    charchamanch.blogspot.com

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  9. बहुत बढ़िया..इंटरनेट का अंतरजाल....

    उत्तर देंहटाएं
  10. ब्लॉग जगत हमें बहुत दूर तक जोड़ कर एक परिवार के रूप में आकार दे रहा है..

    उत्तर देंहटाएं
  11. शुक्रिया भाई साहब आपका .आप तशरीफ़ लाए .ब्लॉग जगत की महिमा लाए .

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  12. कुछ शीतल से लेप हैं, कुछ देते हैं घाव।
    बातों-बातों में आपने बहुत बड़ी बात कह दी है।

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  13. अगर ये नहोता तो हम आप आज कहाँ मिल पाते बहुत सुंदर प्रस्तुति,बेहतरीन
    --काव्यान्जलि--

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  14. अंतर जाल का महत्व बताती अच्छी अभिव्यक्ति |
    आशा

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  15. मेरे ब्लॉग पर भी घाव नहीं,शीतल लेप ही है।

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  16. dekho kitna achcha hai antarjaal.hum logon ka time pass to is anterjaal se hi hota hai.science ki yeh bahut badi uplabdhi hai.bahut sundar likha hai.

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  17. वाह ...बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति

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  18. सजा हुआ इस हाट में, सभी तरह का माल।
    घूम-घूम कर मुफ्त में, भर लो खाली थाल

    क्या बात है शास्त्री,आपका माल तो बेशकिमती
    है जी.हम तो निहाल हो जाते हैं आपकी दुकान पर आकर.

    मकर सक्रांति और लोहड़ी की बधाई और शुभकामनाएँ.

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  19. शास्त्री जी लिखा था.
    त्रुटि के लिए क्षमा शास्त्री जी.

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  20. आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (२६) मैं शामिल की गई है /आप मंच पर आइये और अपने अनमोल सन्देश देकर हमारा उत्साह बढाइये /आप हिंदी की सेवा इसी मेहनत और लगन से करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक है
    http://www.hbfint.blogspot.com/2012/01/26-dargah-shaikh-saleem-chishti.html

    उत्तर देंहटाएं

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