श्वेत कुहासा-बादल काले। मौसम के हैं ढंग निराले।। भुवन भास्कर भी सर्दी में, ओढ़ रजाई सो जाता है, तन झुलसानेवाला उसका, रौद्ररूप भी खो जाता है, सर्द हवाओं के झोंको ने, तेवर सब ढीले कर डाले। मौसम के हैं ढंग निराले।। जैसे ही होली जल जाती, मास चैत्र का आ जाता है, तब निर्मल नभ की गोदी में रवि तरुणाई पा जाता है, गर्मी से राहत देने को, घूम रहे पंखे मतवाले। मौसम के हैं ढंग निराले।। वर्षा की ऋतु आ जाने पर, तन से बहता बहुत पसीना, शीलन और उमस के कारण, तब मुश्किल हो जाता जीना, चौपालों पर तब ठलुओं ने, ताश और शतरंज निकाले। मौसम के हैं ढंग निराले।। |
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बृहस्पतिवार, 19 जनवरी 2012
"मौसम के हैं ढंग निराले" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
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वाह!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंमौसम के निराले ढंग...और ये निराली कविता...
बहुत सुन्दर.
मौसम के ढंग निराले हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंचाचा ने कह डाले हैं
भुवन भास्कर जब हैं आते
मेरे चाचू परेशन हो जाते
ओढ़ रज़ाई सो जाते हैं
जाड़ा बहुत सतावे हैं
होली के आते ही चाचा
हो जाते मतवाले हैं
चाची संग खेले होली
बच्चो को डाट पिलावे हैं
मौसम के रंग निराले हैं
सावन का महीना
चाचा जी को बीमार कर देता हैं
चाची चली जाती हैं मायके
चाचा का ख़याल कोई ना रखता हैं
तब चाचा जी ने नये खेल निकाले हैं
ताश और शतरंज से
अपना दिल बहला डाले हैं
मौसम के हैं ढंग निराले।।
फिलहाल तो ठिठुराती ठंड है
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुंदर गीत
्मौसम के ढग तो होते ही निराले हैं।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआजकल तो ठण्ड ने बहुत ही कंपा दिया है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंरजाई में दुबककर ही लेपटॉप पर पोस्ट पढी जा रही है। बढिया है कविता।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुन्दर ऋतु गीत.... बहुत बढ़िया...
प्रत्युत्तर देंहटाएंsundar
प्रत्युत्तर देंहटाएंsamayanukool rachna bahut sundar.aaj sardi me subah subah esa hi najara dekha.
प्रत्युत्तर देंहटाएंgajab ki prastuti ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंजीवन का असली रस परिवर्तन में ही है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंचित्र देखकर ठिठुर रहे हम..
प्रत्युत्तर देंहटाएंआज के मौसम पर लिखी गई सटीक लेखनी ...बहुत खूब
प्रत्युत्तर देंहटाएंयही तो हम सब का सौभाग्य है जो हम ऐसे देश मे हैं जहां इतने बहुरंगी मौसमों का मजा है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसब मौसम में सर्दियाँ ही सबसे निराली हैं .
प्रत्युत्तर देंहटाएंबढ़िया गीत.
क्या बात है सर! मौसम भी पराया हो गया है शर्दी की बाजार में ,सुखद,रोचक रचना .....
प्रत्युत्तर देंहटाएंsateek v samyik prastuti .aabhar .
प्रत्युत्तर देंहटाएंअद्भुत वर्णन है मौसम का..कितनी सुन्दरता से किया है ..बधाई..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत बढ़िया रचना
kalamdaan.blogspot.com
सच में मौसम के रंग निराले होते हैं।
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोली के आते ही चाचा
प्रत्युत्तर देंहटाएंहो जाते मतवाले हैं
चाची संग खेले होली
बच्चो को डाट पिलावे हैं
मौसम के रंग निराले हैं
वाह जी वाह!
चाची के संग होली
और बच्चों को डाट
यह कोई अच्छी नही है बात.
शुक्र है अभी तो सर्दी है.
अब तो सुधर जाओ चाचा.