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गुरुवार, 19 जनवरी 2012

"मौसम के हैं ढंग निराले" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


श्वेत कुहासा-बादल काले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।

भुवन भास्कर भी सर्दी में,
ओढ़ रजाई सो जाता है,
तन झुलसानेवाला उसका,
रौद्ररूप भी खो जाता है,
सर्द हवाओं के झोंको ने,
तेवर सब ढीले कर डाले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।

जैसे ही होली जल जाती,
मास चैत्र का आ जाता है,
तब निर्मल नभ की गोदी में
रवि तरुणाई पा जाता है,
गर्मी से राहत देने को,
घूम रहे पंखे मतवाले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।

वर्षा की ऋतु आ जाने पर,
तन से बहता बहुत पसीना,
शीलन और उमस के कारण,
तब मुश्किल हो जाता जीना,
चौपालों पर तब ठलुओं ने,
ताश और शतरंज निकाले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!!
    मौसम के निराले ढंग...और ये निराली कविता...
    बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. मौसम के ढंग निराले हैं
    चाचा ने कह डाले हैं
    भुवन भास्कर जब हैं आते
    मेरे चाचू परेशन हो जाते
    ओढ़ रज़ाई सो जाते हैं
    जाड़ा बहुत सतावे हैं

    होली के आते ही चाचा
    हो जाते मतवाले हैं
    चाची संग खेले होली
    बच्चो को डाट पिलावे हैं
    मौसम के रंग निराले हैं

    सावन का महीना
    चाचा जी को बीमार कर देता हैं
    चाची चली जाती हैं मायके
    चाचा का ख़याल कोई ना रखता हैं
    तब चाचा जी ने नये खेल निकाले हैं
    ताश और शतरंज से
    अपना दिल बहला डाले हैं
    मौसम के हैं ढंग निराले।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. फिलहाल तो ठिठुराती ठंड है
    सुंदर गीत

    उत्तर देंहटाएं
  4. ्मौसम के ढग तो होते ही निराले हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आजकल तो ठण्ड ने बहुत ही कंपा दिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. रजाई में दुबककर ही लेपटॉप पर पोस्‍ट पढी जा रही है। बढिया है कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर ऋतु गीत.... बहुत बढ़िया...

    उत्तर देंहटाएं
  8. samayanukool rachna bahut sundar.aaj sardi me subah subah esa hi najara dekha.

    उत्तर देंहटाएं
  9. जीवन का असली रस परिवर्तन में ही है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आज के मौसम पर लिखी गई सटीक लेखनी ...बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  11. यही तो हम सब का सौभाग्य है जो हम ऐसे देश मे हैं जहां इतने बहुरंगी मौसमों का मजा है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. सब मौसम में सर्दियाँ ही सबसे निराली हैं .

    बढ़िया गीत.

    उत्तर देंहटाएं
  13. क्या बात है सर! मौसम भी पराया हो गया है शर्दी की बाजार में ,सुखद,रोचक रचना .....

    उत्तर देंहटाएं
  14. अद्भुत वर्णन है मौसम का..कितनी सुन्दरता से किया है ..बधाई..
    बहुत बढ़िया रचना
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  15. सच में मौसम के रंग निराले होते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  16. होली के आते ही चाचा
    हो जाते मतवाले हैं
    चाची संग खेले होली
    बच्चो को डाट पिलावे हैं
    मौसम के रंग निराले हैं

    वाह जी वाह!

    चाची के संग होली
    और बच्चों को डाट

    यह कोई अच्छी नही है बात.
    शुक्र है अभी तो सर्दी है.
    अब तो सुधर जाओ चाचा.

    उत्तर देंहटाएं

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