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रविवार, 15 जनवरी 2012

"1200वीं पोस्ट-कंकड़ और कबाड़" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


खिचड़ी देती है मज़ा, कंकड़ देते कष्ट।
रसना के आनन्द को, कर देते है नष्ट।।

लेकर छलनी छानिए, कंकड़ और कबाड़।
मलयानिल के वास्ते, खोलो बन्द किवाड़।।

त्यौहारों में बाँटिए, खुशी और आनन्द।
सम्बन्धों में कीजिए, बैर-भाव को बन्द।।

मत पाने के लिए जो, बाँट रहे हैं नोट।
जब गद्दी मिल जाएगी, लेंगे नोच-खसोट।।

सुमन गोद में पालते, सदा नुकीले शूल।
मित्रों के अनुकूल हैं, शत्रु के प्रतिकूल।।

25 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी 1200 वी पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई ....यूँ ही सिलसिला चलता रहें यही कामना है ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक प्रेरणादायक प्रस्तुति !
    इस १२०० वी पोस्ट पर बहुत शुभकामनाएँ !
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुमन गोद में पालते, सदा नुकीले शूल।
    मित्रों के अनुकूल हैं, शत्रु के प्रतिकूल।।
    1200 वीं पोस्ट पर हार्दिक शुभकामनाये.

    उत्तर देंहटाएं
  4. 1200 वी पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई ..शास्त्री जी..ये सिलसिला यूँ ही चलती रहे..

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बहुत शुभकामनाएं..
    मुझे नहीं लगता कि आपका रिकार्ड कोई तोड़ पाएगा। ब्लाग के सचिन को मै सैल्यूट करता हूं।
    बहुत बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  6. मत पाने के लिए जो, बाँट रहे हैं नोट।
    जब गद्दी मिल जाएगी, लेंगे नोच-खसोट।।
    bahut khoob babu ji....
    bahut bahut shubhkamnayen...aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  7. बधाई, शुभकामनाएं. जोर-ए-कलम और जियादा हो . और बढ़िया रचनाएं हमें पढ़ने को मिलती रहें.

    उत्तर देंहटाएं
  8. 1200 वीं पोस्ट पर हार्दिक शुभकामनायें.
    इन लघु-लघु छंदों में आप व्यवहार के सार-तत्व समेट देते हैं -साधु !

    उत्तर देंहटाएं
  9. 1200 वीं पोस्ट पर हार्दिक शुभकामनायें.ये सिलसिला यूँ ही चलता रहे।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बढ़िया प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 16-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  11. कंकड़ और कबाड़ को अलग कर के ही खिचड़ी का मज़ा लिया जा सकता है...खिचड़ी की शुभकामनाएं...

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  12. बहुत सुंदर रचना अच्छी लगी.....
    १२०० वी पोस्ट के लिए बहुत२ शुभकामनाए
    शास्त्री जी,एक निवेदन है,कि आप् मेरे समर्थक बने,मै तो बहुत पहले से ही आपका समर्थक बन गया हूँ मुझे आत्मीय खुशी होगी,....आभार
    new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

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  13. बेसुरा सुर साज से आने लगा,
    पेड़ अपने फल स्वयं खाने लगा,
    भाई से तकरार भाई ठानता है।
    मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।
    सुन्दर रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत बधाई और शुभकामनायें
    बहुत बढ़िया रचना है ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  15. 1200 वीं पोस्ट की बधाई स्वीकार करें.
    सुंदर और सटीक दोहों में जीवन के दर्शन हो गये.

    उत्तर देंहटाएं
  16. सभी दोहे बढ़िया लगे .. १२०० वीं पोस्ट की बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  17. सारे ही दोहे उत्‍तम हैं। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  18. १२००वी पोस्ट के लिए के लिए बहुत बहुत बधाई |

    उत्तर देंहटाएं

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