"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

"जल रहा च़िराग है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


सवाल पर सवाल हैं, कुछ नहीं जवाब है।
राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

गीत भी डरे हुए, ताल-लय उदास हैं.
पात भी झरे हुए, शेष चन्द श्वास हैं,
दो नयन में पल रहा, नग़मग़ी सा ख्वाब है।
राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

ज़िन्दगी है इक सफर, पथ नहीं सरल यहाँ,
मंजिलों को खोजता, पथिक यहाँ-कभी वहाँ,
रंग भिन्न-भिन्न हैं, किन्तु नहीं फाग है।
राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

बाट जोहती रहीं, डोलियाँ सजी हुई,
हाथ की हथेलियों में, मेंहदी रची हुई,
हैं सिंगार साथ में, पर नहीं सुहाग है।
राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

39 टिप्‍पणियां:

  1. इस अँधेरी रात में,जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।..............वाह बहुत खूब


    कहीं ना कहीं उम्मीद की किरण अब भी बाकि हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. जी बहुत सुंदर रचना
    क्या कहने...

    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है,

    उत्तर देंहटाएं
  3. यही आग...आशा की किरण है!बहुत सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  4. madhur kavy...mere blog par aakar aashirvaad dene ki kripa kijiyega...iti..

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन..अनमोल..
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  6. हवा चलेगी, राख उड़ेगी, चिन्गारी तब फैलेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

    Bahut khhob..

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

    aag bujhegee kee nahee koi nahee jaantaa
    achhee abhivyakti

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह...
    बेहतरीन रचना..
    शुभकामनाएँ मकर संक्रांति पर्व की..

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. लाजवाब
    लोहडी और मकर संक्राति की हार्दिक शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  12. आप को और आप के परिवार को लोहड़ी पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  13. बाट जोहती रहीं, डोलियाँ सजी हुई,
    हाथ की हथेलियों में, मेंहदी रची हुई,
    हैं सिंगार साथ में, पर नहीं सुहाग है।

    ....लाज़वाब! बेहतरीन प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुन्दर , अति सुन्दर , आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधार कर स्नेह प्रदान करें.

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह साहब, वाह. दिल के भावों का सुन्दर चित्रण.

    उत्तर देंहटाएं
  16. bahut sunder sheet ritu me garmi ka ehsas karati rachna........

    उत्तर देंहटाएं
  17. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,...

    उत्तर देंहटाएं
  18. कभी तो राख से भी निकल ,कर चिंगारी भड़केगी ..बहुत सुन्दर रचना ..

    उत्तर देंहटाएं
  19. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।
    बहूत सुंदर रचना .
    शुभ मकर संक्रांति..

    उत्तर देंहटाएं
  20. लोहडी और मकर संक्रांति की शुभकामनाएं.....


    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  21. bahut umda aur saarthak rachna...

    सवाल पर सवाल हैं, कुछ नहीं जवाब है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

    aapko bhi lohadi aur makar sankraanti ki shubhkaamnaayen.

    उत्तर देंहटाएं
  22. कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  23. कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  24. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है
    शायद इन जुगनुओ की ही रोशनी से नीड मिल जाये
    बहुत खूबसूरत रचना

    उत्तर देंहटाएं
  25. राख में ढकी हुई,आपके दिल की आग
    में बहुत तपन है शास्त्री जी.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार जी.

    उत्तर देंहटाएं
  26. बहुत सुन्दर रचना !
    आभार !
    मेरी नई पोस्ट पे आपका वागत है !

    उत्तर देंहटाएं
  27. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।


    खूबसूरत....
    लाजवाब....

    क्या कहें और...

    उत्तर देंहटाएं
  28. इस अँधेरी रात में, जुगनुओं की भीड़ है,
    अजनबी तलाशता, सिर्फ एक नीड़ है,
    रौशनी के वास्ते, जल रहा च़िराग है।
    राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।
    ....
    आदरणीय शास्त्री जी ...इस दुनिया में हर कोई अजनबी है ...सबको अपने मुकाम की तलाश है ...अब जिसने चिराग जला रखा है एक न एक दिन अपने नीद तक पहुँच ही जायेगा|
    प्रेरक रचना !!

    उत्तर देंहटाएं
  29. बाट जोहती रहीं, डोलियाँ सजी हुई,हाथ की हथेलियों में, मेंहदी रची हुई,हैं सिंगार साथ में, पर नहीं सुहाग है।राख में ढकी हुई, हमारे दिल की आग है।।

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    आदरणीय शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails