मन के कोमल अनुभावों से, करता हूँ माँ का अभिनन्दन। शब्दों के अक्षत्-सुमनों से, करता हूँ मैं पूजन-वन्दन।। मैं क्या जानूँ लिखना-पढ़ना, नहीं जानता रचना गढ़ना, तुम हो भाव जगाने वाली, नये बिम्ब उपजाने वाली, मेरे वीराने उपवन में आ जाओ बनकर तुम चन्दन। शब्दों के अक्षत्-सुमनों से, करता हूँ मैं पूजन-वन्दन।। कितना पावन माँ का नाता, तुम वाणी हो मैं उदगाता, सुर भी तुम हो, तान तुम्हीं हो, गीत तुम्ही हो, गान तुम्हीं हो, वीणा की झंकार सुना दो, तुम्हीं साधना, तुम ही साधन। शब्दों के अक्षत्-सुमनों से, करता हूँ मैं पूजन-वन्दन।। मुझको अपना कमल बना लो, सेवक को माता अपना लो, मेरी झोली बिल्कुल खाली, दूर करो मेरी कंगाली, ज्ञान सिन्धु का कणभर दे दो, करता हूँ तेरा आराधन। शब्दों के अक्षत्-सुमनों से, करता हूँ मैं पूजन-वन्दन।। |
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शनिवार, 28 जनवरी 2012
"करता हूँ माँ का अभिनन्दन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
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bahut sundar shandar sarasvati vandana.vasantpanchami ki shubhkamnayen.
प्रत्युत्तर देंहटाएंसामयिक, प्रभावशाली और विनम्र भाव में की गयी आराधना. हमारे पूजा के दो शब्द श्रद्धा सहित अर्पित माँ के युगल चरण को.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबसंत पंचमी की शुभकामनाएं....!
मां शारदे को नमन!
वीणावादनि वर दे..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर आराधना...माँ शारदे की कृपा बनी रहे!
प्रत्युत्तर देंहटाएंबसंत पंचिमी से पावन अवसर पर मयंक जी की ये सरस्वती वन्दना बहुत सरल व सुन्दर शब्दों में लिखी गयी है. मयंक जी की विद्वता को प्रणाम.
प्रत्युत्तर देंहटाएंनमन वीणावादिनी को. और आपकी लेखनी को.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुन्दर सरस्वती वंदना शास्त्री जी ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवसंत पंचमी की शुभकामनायें ।
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबसंत पंचमी की शुभकामनाएं.
माँ सरस्वती की कृपा यूँ ही बनी रहे...
सादर.
बसंत पंचमी की शुभकामनाएं.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबसंत पंचमी की शुभकामनाएं
प्रत्युत्तर देंहटाएंमैं क्या जानूँ लिखना-पढ़ना,
प्रत्युत्तर देंहटाएंनहीं जानता रचना गढ़ना,
तुम हो भाव जगाने वाली,
नये बिम्ब उपजाने वाली,
मेरे वीराने उपवन में
आ जाओ बनकर तुम चन्दन।
शब्दों के अक्षत्-सुमनों से,
करता हूँ मैं पूजन-वन्दन।।..
बहुत सुंदर पंक्तियाँ ...अच्छी रचना
वंदन ,अभिनन्दन ,बधाईयां , श्रद्धावनत इस स्तुति काव्य को सृजित करने के लिए ..... बहुत -२ आभार /
प्रत्युत्तर देंहटाएंमाँ की महिमा का बेहद सुन्दर गुणगान्)वसंत पंचमी की शुभकामनायें ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंजय माँ वीणा वादिनी..सुन्दर आराधना.
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुंदर रचना।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
प्रत्युत्तर देंहटाएंआज चर्चा मंच पर देखी |
बहुत बहुत बधाई ||
मां शारदे को नमन....सुंदर रचना..
प्रत्युत्तर देंहटाएंमाँ सरस्वती की बहुत सुन्दर प्रार्थना ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंवसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ ....
माता सरस्वती की असीम कृपा आप पर सदा बनी रहे ...
उत्कृष्ट प्रस्तुति
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत उम्दा रचना।
प्रत्युत्तर देंहटाएंमां को शारदे नमन!
प्रत्युत्तर देंहटाएंमैं क्या जानूँ लिखना-पढ़ना,
प्रत्युत्तर देंहटाएंनहीं जानता रचना गढ़ना,
तुम हो भाव जगाने वाली,
नये बिम्ब उपजाने वाली,
मेरे वीराने उपवन में
आ जाओ बनकर तुम चन्दन।
शब्दों के अक्षत्-सुमनों से,
करता हूँ मैं पूजन-वन्दन।।
सुन्दर भाव....दादू....!
सरस्वती से कंगाली दूर करने की अपेक्षा...कण भर ज्ञान अवश्य मिल सकता है...
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
प्रत्युत्तर देंहटाएंआज चर्चा मंच पर देखी |
बहुत बहुत बधाई ||
आपकी इस श्रद्धापूर्ण कामना में हमारी कामना भी निहित है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंमाँ-सरस्वती हम सब की कामना पूरी करें यही विनती है !