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रविवार, 29 जनवरी 2012

"रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

जल में-थल में, नीलगगन में,
 छाया है देखो उजियारा।
सबकी आँखों में सजता है,
रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा।।

कलियाँ चहक रही उपवन में,
गलियाँ महक रही मधुबन में,
कल-कल, छल-छल करती धारा।
सबकी आँखों में सजता है,
रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा।।

पंछी कलरव गान सुनाते,
तोते आपस में बतियाते,
दहका टेसू बन अंगारा।
सबकी आँखों में सजता है,
रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा।।

सूरज जन-जीवन को ढोता,
चन्दा शीतल-शीतल होता,
दोनों हरते हैं अंधियारा।
सबकी आँखों में सजता है,
रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा।।

भँवरे गुन-गुन करते आते,
कलियों फूलों पर मँडराते,
मौसम ने मधुमास सँवारा।
सबकी आँखों में सजता है,
रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. बसंत पर्व की बधाई | बसंती पोस्ट ने मन मोह लिया | आभार |

    उत्तर देंहटाएं
  2. दिल्ली जैसी जगह में रहकर इस तरह की सुंदर कविता नहीं लिखी जा सकती ☺

    उत्तर देंहटाएं
  3. pharmacy emergency uk http://sundrugstore.net/products/vasotec.htm changing the world in the field of pharmacy

    उत्तर देंहटाएं
  4. बसंत ऋतू की बहुत-बहुत बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बसन्त आपकी पंक्तियों में भी उतर आया है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर...वासंती रचना...
    शुभकामनाये

    उत्तर देंहटाएं
  7. बासंती रंगो से रंगी सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 30-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर बसन्ती रचना,बेहतरीन प्रस्तुति,

    welcome to new post ...काव्यान्जलि....

    उत्तर देंहटाएं
  10. बसंत तो हर कवी की प्रेरणा है ..
    बसंत पंचमी की शुभकामनायें..
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  11. पंछी कलरव गान सुनाते,
    तोते आपस में बतियाते,
    दहका टेसू बन अंगारा।
    सबकी आँखों में सजता है,
    रूप बसन्ती प्यारा-प्यारा।।
    पुलकित करता प्रकृति नटी का सुन्दर चित्र .
    टेसू के रंग शाष्त्री जी के संग .

    उत्तर देंहटाएं

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