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सोमवार, 23 जनवरी 2012

"ज़ज़्बात जब पिघलते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
शब्द तब शायरी में ढलते हैं

चैन मिलता नहीं है रातों को
ख़वाब में करवटें बदलते हैं

संग-ए-दिल में दबे हुए शोले
वक्त के साथ ही मचलते हैं

ग़म की बदली या धूप हो सुख की
अश्क आँखों से ही निकलते हैं

ईद-क्रिसमस हो या दिवाली हो
जब खुशी हो चराग़ जलते हैं

रूप ग़ुल का वहाँ निखरता है
शोख़ अरमान जहाँ पलते हैं

44 टिप्‍पणियां:

  1. दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
    शब्द तब शायरी में ढलते हैं
    ग़म की बदली या धूप हो सुख की
    अश्क आँखों से ही निकलते हैं...
    बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियाँ ! चित्र बहुत सुन्दर लगा! शानदार रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक बार फिर बहुत बढ़िया कविता. दाद तो देनी ही पड़ेगी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. शास्त्री जी,बहुत सुंदर लिखा आपने,...बधाई
    बेहतरीन पोस्ट....
    new post...वाह रे मंहगाई...

    उत्तर देंहटाएं
  4. भारतीय नागरिक - Indian Citizen 4:16 अपराह्न (4 मिनट पहले)
    भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने आपकी पोस्ट " "ज़ज़्बात जब पिघलते हैं" (डॉ.र...

    भारतीय नागरिक - Indian Citizen द्वारा blogger.bounces.google.com
    4:16 अपराह्न (4 मिनट पहले)

    मुझे
    भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने आपकी पोस्ट " "ज़ज़्बात जब पिघलते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    एक बार फिर बहुत बढ़िया कविता. दाद तो देनी ही पड़ेगी.

    रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
    4:21 अपराह्न (0 मिनट पहले)

    भारतीय
    आपकी टिप्पणी मेल में तो आ जाती है मगर ब्लॉग पर दिखाई नहीं देती है!
    क्या कारण होगा?

    23 जनवरी 2012 4:16 अपराह्न को, भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने लिखा:

    उत्तर देंहटाएं
  5. @आपकी टिप्पणी मेल में तो आ जाती है मगर ब्लॉग पर दिखाई नहीं देती है!
    क्या कारण होगा?
    स्पाम फोल्डर चेक करिये.

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह जी वाह, क्‍या खूब लिखा है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. चैन मिलता नहीं है रातों को
    ख़वाब में करवटें बदलते हैं waah

    उत्तर देंहटाएं
  8. दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
    शब्द तब शायरी में ढलते हैं...बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियाँ ..आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  9. चैन मिलता नहीं है रातों को
    ख़वाब में करवटें बदलते हैं,
    atisundar panktiyan haen .

    उत्तर देंहटाएं
  10. ग़म की बदली या धूप हो सुख की
    अश्क आँखों से ही निकलते हैं

    बेहतरीन रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  11. जिन रातों में नींद उड़ जाती है
    क्या कहर की रातें होती है
    दरवाज़ों से टकरा जाते हैं
    दीवारों से बातें होती है :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर बात कही आपने --



    ग़म की बदली या धूप हो सुख की
    अश्क आँखों से ही निकलते हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  13. दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
    शब्द तब शायरी में ढलते हैं

    बहुत सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  14. हमने देवनागरी मै कर लिया हिन्दी दुनिया ।

    हमने इसलिए अंग्रेजी मै लिखा था क्यो कि जो ओपेरा इस्तमाल करते होगे उन्हे हिन्दी ठिक से नही दिखता ।

    धन्यवाद

    हिंदी दुनिया

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत बहुत सुन्दर..
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  16. सही में शास्त्री जी, मज़ा आ गया इसे पढ़कर!!

    उत्तर देंहटाएं
  17. “रूप” ग़ुल का वहाँ निखरता हैशोख़ अरमान जहाँ पलते हैं..बहुत अच्‍छी लगी गजल। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  18. दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
    शब्द तब शायरी में ढलते हैं
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  19. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट्स पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  20. मनोज कुमार mr.manojiofs@gmail.com द्वारा blogger.bounces.google.com
    10:29 अपराह्न (7 घंटे पहले)

    मुझे
    मनोज कुमार ने आपकी पोस्ट " "ज़ज़्बात जब पिघलते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    सही में शास्त्री जी, मज़ा आ गया इसे पढ़कर!!

    उत्तर देंहटाएं
  21. संगीता स्वरुप ( गीत )
    12:57 पूर्वाह्न (5 घंटे पहले)

    मुझे
    संगीता स्वरुप ( गीत ) ने आपकी पोस्ट " "ज़ज़्बात जब पिघलते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    अच्छी गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  22. संग-ए-दिल में दबे हुए शोले
    वक्त के साथ ही मचलते हैं.waah.

    उत्तर देंहटाएं
  23. रूप यूँ ही निखरता रहे, ईश्वर से प्रार्थना है..

    उत्तर देंहटाएं
  24. बहुत सुन्दर और सटीक गज़ल। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  25. बहुत कमाल का शेर...

    दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
    शब्द तब शायरी में ढलते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  26. बेहतरीन प्रस्‍तुति
    कल 25/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, ।। वक्‍़त इनका क़ायल है ... ।।

    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  27. दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
    शब्द तब शायरी में ढलते हैं

    चैन मिलता नहीं है रातों को
    ख़वाब में करवटें बदलते हैं

    बहुत खूबसूरत गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  28. बहुत गहरे भाव छिपे हैं इस रचना में |
    'गम की बदली हो या धुप हो सुख की
    अश्क आँखों से ही निकलते हैं '\
    बहुत खूब |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  29. ग़म की बदली या धूप हो सुख की
    अश्क आँखों से ही निकलते हैं

    zindagi ki haqeeqat bayan hai gazal ke har sher mein...
    badhayi....

    उत्तर देंहटाएं
  30. “रूप” ग़ुल का वहाँ निखरता है
    शोख़ अरमान जहाँ पलते हैं
    सच में मन को भा गई ये ग़ज़ल
    और सच अच्छा ही होता है....
    सादर
    यशोदा

    उत्तर देंहटाएं
  31. Gam ki badli ho ya dhoop ho sukh ki
    Ashk ankho se hi niklte hai
    SUNDAR BAHUT HI SUNDAR
    KAYAL HOO AAP KA

    उत्तर देंहटाएं
  32. कमाल की अभियक्ति
    बेहतरीन गजल.

    उत्तर देंहटाएं

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