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सोमवार, 9 जनवरी 2012

"दोहे-समझो इनका मर्म" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


जन्म लिया जिस देश में, खाया जिसका अन्न। 
इसको हिंसा-लूट से, करना नही विपन्न।१।

भाषा, धर्म, प्रदेश से, ऊपर होता देश। 
भेदभाव, असमानता, से बढ़ता है क्लेश।२।

वृक्ष धरोहर धरा की, इन्हे बचाना धर्म। 
प्राण वायु के दूत ये, समझो इनका मर्म।३।

माता-पिता, बुजुर्ग का, जिस घर में सम्मान। 
उस घर में रमते सदा, साक्षात् भगवान।४।

सादे जीवन में सदा, होते उच्च विचार। 
तड़क-भड़क में जन्मते, अनाचार-व्यभिचार।५। 

22 टिप्‍पणियां:

  1. एक से बढिया एक प्रेरणास्‍पद दोहे। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सभी दोहे खूबसूरती से प्रस्तुत किये गए ...बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर संदेश देते शानदार और सटीक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रेरणा से परिपूर्ण बढ़िया दोहे!

    उत्तर देंहटाएं
  5. भाषा, धर्म, प्रदेश से, ऊपर होता देश।
    भेदभाव, असमानता, से बढ़ता है क्लेश।२।

    saare dohe ek dam sateek

    kaas aisaa ho jaaye

    उत्तर देंहटाएं
  6. कमयंक जी नमस्कार, नववर्ष की हार्दिक बधाई। प्रेरक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर और सारगर्भित दोहे...

    उत्तर देंहटाएं
  8. behtarin samajik sandesh prsarit karti sarthk post hae,aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सादे जीवन में सदा, होते उच्च विचार।
    तड़क-भड़क में जन्मते, अनाचार-व्यभिचार

    आपके उच्च विचारों से बहुत प्रेरणा मिलती है,शास्त्री जी.
    बहुत बहुत आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुंदर अभिव्यक्ति उच्च विचारों की प्रेरणा देती बढ़िया रचना,....
    --"काव्यान्जलि"--

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेहद ख़ूबसूरत एवं उम्दा दोहे ! बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  12. सुंदर प्रस्‍तुति।
    हर दोहे में संदेश।

    उत्तर देंहटाएं
  13. सादे जीवन में सदा, होते उच्च विचार।
    तड़क-भड़क में जन्मते, अनाचार-व्यभिचार...

    सार्थक और प्रभावशाली सन्देश !

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत प्रेरक, बहुत सुन्दर...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  15. सादे जीवन में सदा, होते उच्च विचार।
    तड़क-भड़क में जन्मते, अनाचार-व्यभिचार.

    कथनी-करनी एक सी, आप सरीखे अल्प
    सादे जीवन का नहीं, कोई और विकल्प.

    प्रेरणादायी और नीतिपरक दोहे...

    उत्तर देंहटाएं

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