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शनिवार, 15 सितंबर 2012

"मौसम के हैं ढंग निराले" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


कहीं धूप है कहीं छाँव है,
कहीं उठ रहे बादल काले।
चिड़ियाँ कलरव गान सुनातीं,
मौसम के हैं ढंग निराले।।
पूरब से आती है पुरवा,
पश्चिम से पछुआ आती है
मस्त हवाओं में मस्ती से,
फसल धान की लहराती है,
जंगल में मयूर ने अपने,
पंख पुराने भू पर डाले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।
चन्दा भी है-सूरज भी है,
नभ का कितना अजब नजारा,
सातों रंग समेटे उगता,
धनुष इन्द्र का कितना प्यारा,
पल में बनता और बिगड़ता,
देख हुए बालक मतवाले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।
बिछा हुआ कालीन घास का,
हरियाली सबको है भाती,
मेढक टर्र-टर्र चिल्लाते,
वर्षा रिम-झिम राग सुनाती,
आसमान का पानी पीकर,
उफन रहे हैं नदियाँ-नाले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. वाह एक और प्यारी सी कविता आपकी कलम से..!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर वर्णन, रसमय भाषा,
    सारे दृश्य दिखा डाले हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. हां जी दो दिन से इस मौसम ने करवट ली हैं ...बढिया प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. बिछा हुआ कालीन घास का,
    हरियाली सबको है भाती,
    मेढक टर्र-टर्र चिल्लाते,
    वर्षा रिम-झिम राग सुनाती,
    आसमान का पानी पीकर,
    उफन रहे हैं नदियाँ-नाले।
    मौसम के हैं ढंग निराले।।
    काव्य सौन्दर्य छंद रस देखते ही बनता है इस गीत(प्रगीत ) का .
    ram ram bhai
    शनिवार, 15 सितम्बर 2012
    देश मेरा - हो गया अकविता ,

    उत्तर देंहटाएं
  5. हुए चंद, रूप मतवाले ,
    मौसम के हैं, ढंग निराले ,
    प्रकृति नटी के, रंग निराले .
    कुछ के मुंह के छीने निवाले ,

    बढ़िया रचना लाये शास्त्री जी .

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया प्रस्तुति |
    पर दिल्ली का मौसम |
    हाय हाय-

    उत्तर देंहटाएं
  7. मनमोहक नज़ारे और दिल को छू लेने वाला कलाम !
    शुक्रिया !

    उत्तर देंहटाएं
  8. मौसम के हर रूप का वर्णन...बहुत सुंदर !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर बरसात के मौसम का चित्रण किया है शास्त्री जी बधाई एक चित्रण ये भी है की मेरे गार्डन के कितने पौधे धराशाई हो गए हैं अतिवृष्टि से

    उत्तर देंहटाएं
  10. मौसम के सारे रंग है कविता में !

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर चित्रमय प्रस्तुति...
    अति सुन्दर...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

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